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16 साल बाद घर पहुंचा ‘लाल’ तो छलके खुशी के आंसू, खींच लाई मां की ममता

2007 में नाथद्वारा में शादी समारोह से हो गया था लापता, मुंबई की संस्था ने किया उपचार, काउंसलिंग कर पहुंचाया घर

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16 साल बाद घर पहुंचा 'लाल' तो छलके खुशी के आंसू, खींच लाई मां की ममता

अपनी माता के साथ लाला

शुभम कडेला/उदयपुर. करीब सोलह साल पूर्व लापता हुए लाला को अचानक अपने बीच देखकर पूरा गांव स्तब्ध रह गया। हर कोई अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पाया। वहीं, अपने पुत्र को देख उसके माता- पिता की खुशी का ठिकाना न रहा। पुत्र को गले लगाया और फूट-फूटकर रोने लगे। खुशी के आंसू देखकर ग्रामीण भी भावुक हो गए। पूरे गांव में खबर फैल गई कि लाला वापस आ गया तो सभी दौड़ते हुए उसके घर पहुंचे और हाल जाना।
हम जिक्र कर रहे हैं मावली तहसील क्षेत्र की लोपड़ा ग्राम पंचायत के सवानिया गांव निवासी रमेशचंद्र (40) उर्फ लाला पुत्र रूपशंकर श्रीमाली का, जो वर्ष 2007 में लापता हो गया था। उस समय वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था। मुंबई की संस्था श्रद्धा फाउंडेशन ने उसकी काउंसलिंग कर उसे अपने गांव पहुंचाया। इतने समय वह अपने घर का सही पता नहीं बता पा रहा था। हाल ही में पता सही बताने पर फाउंडेशन ने उसे सही सलामत घर पहुंचाया। इसके बाद घर सहित पूरे गांव में हर्ष है। लाला अपने परिवार का इकलौता पुत्र है। उसके एक बड़ी व एक छोटी बहन है।

शादी में खो गई थी परिवार की खुशियां
लाला की मां सीता श्रीमाली ने बताया कि वे वर्ष 2007 में नाथद्वारा में मौसी के पुत्र की शादी में गए थे। तब लाला की उम्र महज 24 साल थी। उस समय मानसिक अस्वस्थ होने से परिजन उसका खयाल रखते थे। वहां से लाला अचानक लापता हो गया था। जिसे काफी ढूंढा, लेकिन पता नहीं चला। मावली थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई, इसके बावजूद इतने सालों तक उसकी कोई खबर नहीं थी।

मुझे पता था कि मेरा लाला आएगा
मां सीता ने बताया कि इतने साल बीतने के बाद मन में डर सा बैठ गया था। बीच में कोरोना महामारी ने दिल को झकझोर दिया। लेकिन मुझे विश्वास था कि मेरा लाला वापस जरूर आएगा और इसी सकारात्मकता के साथ खुद को मजबूत करने का प्रयास करती रही।

गुजरात के रास्ते भटक रहा था लाला
मुंबई में श्रद्धा फाउंडेशन ने लाला का उपचार किया। उसके द्वारा सही पता बताने पर काउंसलर रमेश कुमावत ने सकुशल उसे घर पहुंचाया। ग्रामवासियों ने खुशी से फाउंडेशन को 12 हजार 500 रुपए का चेक देकर आभार जताया। कुमावत ने बताया कि लाला गुजरात के रास्ते पर भटक रहा था। जिसे वहां की एक संस्था के सहयोग से श्रद्धा फाउंडेशन कर्जत, महाराष्ट्र में भर्ती करवाया। जहां उसका उपचार किया गया।

सूचना मिलने पर दौड़ते हुए पहुंचे परिजन
संस्था के सदस्य दो दिन पहले लाला को लेकर सुबह 7 बजे पहुंचे। इस दौरान लाला के माता-पिता पूनावली, राजसमंद में एक सामाजिक कार्यक्रम में गए हुए थे। घर के समीप भोलेनाथ मंदिर के पुजारी ने लाला को पहचाना। इसके बाद माता-पिता को सूचना दी गई। जैसे ही माता-पिता को लाला के लौटने की खबर मिली, वे तुरंत दौड़ते भागते घर पहुंचे और अपने पुत्र को गले से लगाकर खुशी से बिलख-बिलख कर रोने लगेे। यह दृश्य देख हर किसी की आंखें नम हो गई।