23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भगवान जगन्नाथ इस बार नए रथ में देंगे दर्शन, 85 किलो चढ़ाई चांदी

भगवान जगन्नाथ इस बार नए रथ में देंगे दर्शन, 85 किलो चढ़ाई चांदी - 21 फीट ऊंचा है रथ, कुल 28 खण्डों से मिलकर तैयार होगा - रथ निर्माण अंतिम चरण में, 12 जुलाई को रथयात्रा संभावित

2 min read
Google source verification
भगवान जगन्नाथ इस बार नए रथ में देंगे दर्शन, 85 किलो चढ़ाई चांदी

भगवान जगन्नाथ इस बार नए रथ में देंगे दर्शन, 85 किलो चढ़ाई चांदी

प्रमोद सोनी / उदयपुर. कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते प्रभु जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा पिछले साल नहीं निकल पाई थी। इस बार भी रथयात्रा निकलेगी या नहीं इसे लेकर असमंजस की स्थिति है। लेकिन, खास बात ये है कि भगवान जगन्नाथ इस बार नए रथ में बिराजेंगे। लॉकडाउन व कई अन्य बाधाओं के बावजूद रथ निर्माण का कार्य प्रगति पर है। गौरतलब है कि हर वर्ष प्रभु जगन्नाथ राय रजत रथ में बिराजित होकर नगर में भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं। बता दें कि रथयात्रा की शुरुआत वर्ष 1995 से हुई थी, इससे पहले प्रभु को रजत रथ में बिराजित कर मंदिर परिसर में ही परिक्रमा करवाई जाती थी। यह परंपरा 368 वर्ष पुरानी है।

करीब दो वर्ष से हो रहा रथ का निर्माण

प्रभु जगन्नाथ के लिए श्री रथ समिति ने नए रजत रथ का निर्माण करवाया है क्योंकि प्रभु का रजत रथ पुराना हो गया था। श्री रथ समिति की 2019 की वार्षिक बैठक में समिति के करीब 400 सदस्यों ने प्रस्ताव पारित कर नए रथ का निर्माण करने का निर्णय लिया था। ठाकुरजी के लिए दो वर्ष पूर्व नए रजत रथ का निर्माण शुरू किया गया, जो अभी अंतिम चरण में चल रहा है। 19 जुलाई, 2019 को रथयात्रा की समाप्ति के बाद रथ को खोलकर नए रथ के निर्माण के लिए भेज दिया गया था।

समिति व भक्त उठा रहे रथ निर्माण का खर्च श्री रथ समिति के अध्यक्ष राजेंद्र श्रीमाली ने बताया कि रथ निर्माण में जो खर्च हो रहा है वह समिति व भक्तों के सहयोग से किया जा रहा है। इसके लिए कई भक्तों ने चांदी भेंट की तो कई ने आर्थिक सहयोग किया। रथ निर्माण में सचिव रवि माली, उपाध्यक्ष गुंजन दीक्षित, सुरेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष कृष्ण गोपाल बोहरा, वरिष्ठ सदस्य हरीश पालीवाल, अम्बालाल लौहार, समिति प्रमुख कैलाश मेघवाल, संरक्षक घनश्याम चावला सहित करीब 20 से 30 कार्यकर्ता दिन रात जुटे हुए हैं। लकड़ी के रथ का काम अर्बुदा हैंडीक्राफ्ट के गोपाल सुथार चिकलवास की ओर से निस्वार्थ किया गया है। इसके बाद चौहान हैंडीक्राफ्ट के राजू, कमल, महेश की देखरेख में 6 कारीगरों द्वारा चांदी चढ़ाई का काम जगदीश मंदिर में किया जा रहा है।

यह है रथ की विशेषता

- 16 फीट लम्बाई, 8 फीट चौड़ाई व 21 फीट ऊंचाई- लगभग 85 किलो चांदी चढ़ाई गई- रथ कुल 28 खण्डों में है, जिन्हें जोडऩे पर रथ बनता है।- रथ के दोनों ओर पहियों के ऊपर लगने वाले फड़कों के आगे हंस व पीछे शेर का मुख होगा।- रथ के पिलर हैदराबादी नक्काशी में बनाए गए हैं।- रथ के पहियों को 6 इंच अंदर लिया गया है ताकि कोई दुर्घटना नहीं हो। वहीं रथ में इस बार हाइड्रोलिक ब्रेक भी लगाए गए हैं ताकि रथ को रोकने में कोई दिक्कत ना हो।- इस बार रथ में बिराजित प्रभु के सम्मुख दर्शन के लिए भक्तों को परेशानी नहीं होगी क्योंकि इस बार घोड़ों को नीचे किया गया है। पहले घोड़े दो पैरों पर खड़े थे, उन्हें तीन पैरों पर खड़ा किया गया है।