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Maharana Pratap Jayanti 2018 : विदेशी धरती पर मेवाड़ के वीर सपूत महाराणा प्रताप का डंका

महानायक प्रताप के प्रति लोगों की श्रद्धा व लगाव केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी

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Maharana Pratap Jayanti 2018 : विदेशी धरती पर मेवाड़ के वीर सपूत महाराणा प्रताप का डंका

मधुलिका सिंह/ उदयपुर. महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्यागमय जीवन को वरण किया, उसी ने उन्हें एक महानायक की छवि प्रदान की। महाराणा प्रताप राष्ट्रीय इतिहास में वीरता व स्वाभिमान के पर्याय हैं। मेवाड़ की धरती और यहां का कण-कण उनकी वीरता की कहानियां स्वत: कहते हैं। लेकिन मेवाड़ के महाराणा प्रताप की ख्याति केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उतनी ही फैली है। यहां भी प्रताप के प्रति लोग श्रद्धा व लगाव रखते हैं।

महाराणा प्रताप पर शोध करने वाले उदयपुर मीरा गल्र्स कॉलेज के व्याख्याता डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि विदेशों में भी महानायक प्रताप के अनुयायी हैं। इस महानायक के प्रति रूझान सीमा पार भी मिलता है क्योंकि ये संस्कृति और राष्ट्र पुरुष थे। डॉ. शर्मा ने अपनी पुस्तक ‘युगंधर प्रताप’ में इस बात का उल्लेख भी किया है।


वियतनाम ने माना था अपना प्रेरक:

डॉ. शर्मा ने अपनी पुस्तक में इस घटना का उल्लेख करते हुए लिखा है कि वियतनाम के विदेश मंत्री हो ची मिन्ह द्वारा अमरीका के खिलाफ 20 साल के लंबे संघर्ष जीतने के बाद जब उनसे पूछा गया कि वियतनाम जैसा छोटे से राष्ट्र को अमरीका जैसी महाशक्ति से लडऩे की प्रेरणा कहां से मिली तो जवाब में उन्होंने कहा कि इसकी प्रेरणा उन्हें राजस्थान में मेवाड़ के ‘महाराणा प्रताप’ से मिली।

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इन देशों में देखने को मिलता है प्रताप का गौरव
- मॉरिशस की राजधानी पोर्ट लुई में घुड़दौड़ मनोरंजन का साधन है वहां कई प्रवासी भाारतीय निवास करते हैं। इसमें जो घोड़ा सफल होता है, उसे सभी प्रवासी भारतीय ‘चेतक’ के नाम से पुकारते हैं।
-दक्षिण मॉरिशस मे ‘प्रताप बैठका’ की मान्यताएं हैं जहां सभी लोग बैठकर आपसी चर्चाएं करते हैं, इसलिए उसका नाम ‘प्रताप बैठका’ रखा है।
-सूरीनाम दक्षिण अमरीका में आज भी दानदाता को वहां के प्रवासी भारतीय भामाशाह’ कहकर पुकारते हैं।
-त्रिनिडाड टोबेगो में सन 1985 ईस्वी में वहां हुए ‘भारत की झांकी’ कार्यक्रम में प्रताप का तैलचित्र रखा गया था। वहां के भारतीय विद्या संस्थान में मीरां बाई व महाराणा प्रताप का चित्र संग्रहित है।
-फिजी में भारतीयों की संख्या 4 लाख है, जो स्थायी हैं। वहां का प्रसिद्ध कवि जो दूबू का रहनेवाला है, वो अपनी रचनाओं में अपने नाम की जगह ‘प्रताप’ ही लिखता है।
-अटलांटिक महासागर के उत्तरी छोर पर गुआना में ‘भारत दर्शन उत्सव’ मनाया जाता है। प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले ‘भारत दर्शन उत्सव’ की झांकी में प्रताप का चित्र प्रमुखता लिए होता है। यह सर्वेक्षण देश की सीमा के पार भी प्रताप की अनवरतता का द्योतक है। जो प्रताप की ‘युगंधर’ की छवि बनाता है।