
MAHARANA PRATAP JAYANTI: उदयपुर के इस मंदिर के शिलालेख में लिखा है प्रताप की विजय गाथा का उल्लेख
नरेन्द्र मेनारिया /खरसाण. कस्बे का चारभुजानाथ मंदिर भी महाराणा प्रताप की गाथा गाता है। यहां लगा शिलालेख महाराणा प्रताप कालीन है। इस पर जो श्लोक लिखे है, महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हैं। राणा प्रताप की दिव्यता, जन-जन से जुड़ाव, प्रजा प्रबंधन का अनूठा वर्णन प्रदर्शित है। लिखा है कि एक ओर जनता महाराणा प्रताप की प्रतिज्ञा एवं शौर्य से प्रभावित होकर अनुप्राणित थी, वहीं दूसरी ओर महाराणा की विजय के डकें बजाकर संबल बढ़ाने का कार्य भी कर रहे हैं।
शिलालेख पर प्रथम श्लोक भगवान विष्णु की स्तुति है। उनके गुणों के अनुसार नामोच्चारण कर गायन करता है। गोविंद केशव जनार्दन से प्रारम्भ कर नारायण अच्युत एवं नृसिंह को नमन करने के लिए गाया गया है। इस नमन के बाद विजय गान का उद्घोष है। महाराणा प्रताप के विजय अभियान के उत्सव में देवियां और रानिया विजय गान गा रही है। चहल पहल ऐसी हो रही है, जैसे कोई विषद कार्य घर आंगन में हो रहा हो।
शत्रु वध का महोत्सव मनाया जा रहा है। उन्मुक्त वातावरण में मुक्ति के गान गाये जा रहे हैं। गोप-गोपियां, राजा और राज कन्याएं इतनी आनंदित है, मानो माता पिता कि शरण प्राप्त हुई हो। महाराणा प्रताप की विजय से संत एवं समाज दोनों ही उन्मुक्त शरण को प्राप्त हुए हैं। शिलालेख में आया है कि 1632 संवत्सर तदनुसार 1498 शक संवत्सरे ईसवर सन् 1576 हल्दीघाटी युद्ध के बाद का समय। यहां संवतर 1632 लिखा है तथा शक संवत 1498 है।
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गुजरात का जुड़ाव
जिस पंडित की मौजूदगी में शिला लेख लिखा है, वह गुजरात का होने का प्रमाण है। क्योंकि गुजरात के पंडित अनु भट्ट का भी उल्लेख है। इसमें खरसाण के मेनारिया ब्राह्मणों के नाम उल्लेे खि त है।
Published on:
16 Jun 2018 01:18 pm
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