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देवशयनी एकादशी से चार माह थमेगी सावों की धूम, नवंबर-दिसंबर में फिर गूंजेंगी शहनाइयां

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उदयपुर

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Newsdesk

Jul 23, 2026

Rajasthan

Bफोटो : एआई जनरेट
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B- बुधवार को भड़ल्या नवमी के अबूझ मुहूर्त में हुए कई विवाहB
B-20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के बाद शुरू होंगे मांगलिक कार्यB
Bराजसमंद.B देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है। इस दिन से चातुर्मास भी प्रारंभ होते हैं। इसके साथ ही विवाह, उपनयन, मुंडन, गृह प्रवेश और उद्यापन जैसे मांगलिक कार्यों पर करीब चार माह के लिए विराम लग जाएगा। अब 20 नवंबर 2026 को देवप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी के बाद ही विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा। विवाह के लिए नवंबर और दिसंबर में कई शुभ मुहूर्त रहेंगे।
सविता संस्कृत संस्थान राजसमंद के आचार्य अर्जुन कृष्ण पालीवाल ने बताया कि खगोल शास्त्र के अनुसार प्रतिवर्ष सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने के बाद विवाह, उपनयन और गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस वर्ष 16 जुलाई की रात्रि 11.19 बजे सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने तथा इसी रात्रि 1.27 बजे गुरु के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई। गुरु 12 अगस्त को पुन: उदय होंगे, लेकिन चातुर्मास के कारण विवाह आदि मांगलिक कार्य नवंबर तक निषेध रहेंगे।
आचार्य पालीवाल ने बताया कि 15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हुई थी, जिसका समापन 23 जुलाई को होगा। इस दौरान 22 जुलाई को भड़ल्या नवमी का अबूझ मुहूर्त रहा, जिसके कारण इस दिन विवाह सहित मांगलिक कार्य किए गए और कई सावे हुए। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा।
चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु के योगनिद्रा में प्रवेश करने की मान्यता के कारण विवाह, मुंडन, उपनयन और उद्यापन जैसे कार्य नहीं किए जाते। हालांकि वाहन खरीद, व्यापारिक कार्य, शिलान्यास, आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य के लिए यह अवधि शुभ मानी जाती है।

-नवंबर-दिसंबर में विवाह के शुभ मुहूर्त
देवप्रबोधिनी एकादशी के बाद विवाह के लिए 21, 22, 24, 25, 26 और 30 नवंबर तथा 2, 3, 4, 5, 11 और 12 दिसंबर को शुभ मुहूर्त रहेंगे।

चातुर्मास में प्रमुख त्योहार
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ होगा। इसके बाद 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा और शिव शयन उत्सव, 9 अगस्त को कामदा एकादशी, 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या, 15 अगस्त को हरियाली तीज, 17 अगस्त को नाग पंचमी, 28 अगस्त को रक्षाबंधन, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, 14 सितंबर को हरितालिका तीज एवं श्रीगणेश चतुर्थी, 15 सितंबर को ऋषि पंचमी, 19 सितंबर को राधाष्टमी, 22 सितंबर को जलझूलनी एकादशी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी।
इसके बाद 11 अक्टूबर से अश्विन नवरात्रि प्रारंभ होगी। 20 अक्टूबर को विजयादशमी, 29 अक्टूबर को करवा चौथ, 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी एवं दीपावली, 10 नवंबर को अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा, 15 नवंबर को सूर्य छठ (डाला छठ), 17 नवंबर को गोपाष्टमी और 18 नवंबर को आंवला नवमी मनाई जाएगी। 20 नवंबर को देवप्रबोधिनी एकादशी का व्रत स्मार्त गृहस्थों के लिए रहेगा और इसी के साथ तुलसी विवाह के बाद मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा।