
सुशील कुमार सिंह /उदयपुर. महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के चर्म, रति एवं कुष्ठ रोग विभाग के अधीन संचालित वार्डों में ‘हठधर्मिता का पर्दा’ पड़ा हुआ है। विशेषज्ञ परामर्श कक्ष को छोडक़र भूतल पर संचालित सभी कमरों के पट (दरवाजे) ओपीडी अवधि के दौरान में बंद रहते हैं। एेसे में यूवी थैरेपी, डेमोस्ट्रेशन कक्ष, लैबोरेट्री सहित अन्य कक्षों में प्रवेश की जरूरतों के बावजूद आम ग्रामीण दरवाजे को बंद देख बाहर से लौट जाता है। वहीं निचले हिस्से में अस्थायी तौर पर तैयार किए गए स्वाइन फ्लू वार्ड के बंद दरवाजे ओपीडी समय में भी सन्नाटे ही हकीकत बयां करते हैं। स्टाफ के भीतर होने के बावजूद बंद पटल की आदतें विभागीय कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न खड़े करती हैं।
राजस्थान पत्रिका की पड़ताल में मंगलवार को कुछ एेसे ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्रथम तल पर बैठने वाले विशेषज्ञों के कमरों पर भी यहां दोपहर २ बजे से पहले ताले पड़ गए। केवल एक जांच कक्ष में स्टाफ की मौजूदगी दिखी तो कार्यालय कक्ष में कुछ लोगों की चर्चा सुनाई दी। इसके अलावा सभी कमरों में मानों सन्नाटा पसरा था। जवाब भी बेतुका इधर, ओपीडी समय में नर्सिंग कक्ष में भी पर्दा रहता है। भीतर बैठे स्टाफ में गपशप जारी रहती है। इस दौरान काउंटर खिडक़ी से मरीजों की ओर से पूछे जाने वाले सवालों का कई बार जवाब नहीं मिलता। कई बार तो काउंटर से मरीज को निराश होकर लौटना पड़ता है। वहीं कई बार मरीजों को इस खिडक़ी से बेतुके जवाब भी मिल जाते हैं। स्टाफ की कमी लैब एवं थैरेपी कक्ष में महंगे उपकरण रखे हुए हैं।
सहायक कर्मचारी के नाम पर विभाग में एक मात्र महिला है, जो अक्सर वार्ड एवं अन्य कामों में व्यस्त रहती है। इसलिए एहतियात के तौर पर कमरों का पट बंदकर रखा जाता है।
किसी को परेशानी होगी तो आगे से व्यवस्था सुधार करेंगे। स्टाफ के बेतुके जवाब की शिकायत मिली है तो उन्हें पाबंद करेंगे।
डॉ. ए.के. खरे, विभागाध्यक्ष, चर्म, रति एवं कुष्ठ रोग विभाग
Published on:
21 Feb 2018 08:00 am
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