
जख्मों की मलहम के बजाय छिडक़ रहे ‘नमक’
डॉ. सुशीलसिंह चौहान/उदयपुर . संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में मरीजों के जख्मों पर मलहम की बजाय ‘जहर’ का लेप हो रहा है। चिकित्सालय के ट्रोमा एवं आर्थोपेडिक सेंटर में मरीजों के घाव को धुलने से लेकर ऑपरेशन थियेटर के लिए प्रदूषित पानी काम आ रहा है। अनजाने में ग्रामीण क्षेत्र से आने वाला गरीब मरीज एवं उनके तिमारदार सप्लाई से जुड़े नलों से पानी पी रहे हैं। घायलों की जिंदगी से इस घिनौने खेल को लेकर हर कोई अनजान बना हुआ है। ट्रोमा एवं आर्थोपेडिक सेंटर में न्यूरो सर्जरी, आर्थोपेडिक एवं गंभीर घायलों का उपचार पूर्व अधीक्षक एवं वर्तमान अधीक्षक की निगरानी में होता है। पहले भी ऐसे मामले सामने आने के बावजूद चिकित्सालय प्रशासन गंभीर नहीं है। गौरतलब है कि ट्रोमा वार्ड में प्रतिदिन लगभग 25 से 30 मरीजों के दाखिले प्रतिदिन होते हैं, वहीं करीब 400-450 मरीजों का ओपीडी रहता है।
कीड़ों से अटी है पेयजल टंकियां
हकीकत यह है कि ट्रोमा सेंटर की छत पर कुल 15 टंकियां है जिनमें से एक टंकी सीमेंट की और शेष 14 प्लास्टिक की टंकियां हैं। इन टंकियों को कई वर्षों से साफ नहीं किया गया है। भीतर काई जमी हुई है और पानी में कीड़े कुलबुला रहे हैं। प्लास्टिक की टंकियों में से किसी पर ढक्कन तक नहीं है।
इसलिए रेजिडेंट खफा
रेजिडेंट यूनियन आरओ लगाने एवं पेयजल व्यवस्था अलग से करने की लगातार मांग उठती रही है। वे किसी भी परिस्थिति में चिकित्सालय का पानी नहीं पीते। घर से साथ लेकर आए पानी का ही उपयोग करते हैं।
प्रक्रिया में निविदा
पेयजल टंकियों की सफाई के लिए चिकित्सालय में ठेका व्यवस्था लागू है। नई निविदा जल्द ही आमंत्रित कर खामियों को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।
विनय जोशी, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल
Published on:
26 Jul 2018 08:22 pm
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