
उदयपुर. संभाग के सबसे बड़े पन्नाधाय राजकीय महिला चिकित्सालय की खामियों भरी व्यवस्थाएं भर्ती प्रसूताओं और उनके तिमारदारों के लिए ‘कोढ़ में खाज’ बनी हुई है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य कक्ष के पीछे स्थानांतरित किए गए वार्ड में भर्ती प्रसूताओं को नि:शुल्क दवाइयों के लिए इन दिनों कुछ ऐसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तीन मंजिला इमारत में संचालित वार्ड की प्रसूताओं को दवा लेने के लिए जनाना की जर्जर इमारत के ऊपर तीसरे माले पर संचालित नई एमसीएच बिल्डिंग भवन तक जाना पड़ रहा है। ऐसे में चिकित्सालय में सक्रिय स्मैकचियों के बीच ग्रामीण महिलाएं रात के अंधेरे में कई बार दवाइयां लेने जाने से कतराती हैं। वार्ड और जर्जर चिकित्सालय के बीच सूनापन भी इसकी एक वजह है।
हो अस्थायी व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज एवं महिला चिकित्सालय प्रशासन को चाहिए कि परिसर में जहां पर भी वार्ड बनाकर गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं की शिफ्टिंग की जा रही है। उनके लिए आवश्यक दवा काउंटर की भी अस्थायी व्यवस्था करनी चाहिए।
हैल्पर नहीं तो नर्सिंग स्टाफ सही
अमूमन प्रशासनिक अमले की दलीलें रहती हैं कि तीन शिफ्टों के लिए उनके पास आवश्यक फार्मासिस्ट की कमी है, जबकि हकीकत किसी से छिपी नहीं है। अधिकांश नि:शुल्क दवा काउंटर्स का संचालन 10वीं पास हैल्पर्स कर रहे हैं, जबकि अस्थायी व्यवस्था के तहत यह दारोमदार पर्याप्त संख्या में मौजूद नर्सिंग स्टाफ को दिया जा सकता है।
यह है हकीकत
जनाना चिकित्सालय के नाम पर 8 स्थायी फॉर्मासिस्ट और एक ठेके पर सेवारत है। एक ओपीडी डीडीसी (नि:शुल्क दवा काउंटर) सुबह 8 से दोपहर 2 बजे के बीच संचालित है। एक आईपीडी काउंटर जो कि आरसीएच बिल्डिंग में संचालित है, 24 घंटे के लिए है।
ऐसा है जवाब
मेडिकल कॉलेज प्रशासनिक भवन के पीछे संचालित वार्ड के दौरे पर सामने आया कि शाम के समय यहां नर्सिंग स्टाफ वार्ड में मरीजों को छोडकऱ गप-शप में मशगूल रहता है। पत्रिका की टीम और कैमरे को देख स्टाफ मौके से भीतर जाकर छिप गया। काउंटर पर पूरी तरह से सन्नाटा छा गया।
बदलना है आईपीडी
तीसरे माले पर संचालित आईपीडी को ओपीडी काउंटर के एक कक्ष शिफ्ट करने की योजना है। दूर वार्ड में शिफ्ट किए जाने वाले पेशेंट को पहले से दवाइयों के साथ भेजते हैं।
डॉ. सुनीता माहेश्वरी, अधीक्षक, जनाना हॉस्पिटल
Published on:
27 Jul 2018 07:54 pm
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