
डॉ सुशील सिंह चौहान/ उदयपुर . संभाग के सबसे बड़े पन्नाधाय महिला राजकीय चिकित्सालय में गर्भवती महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। यूनिट के बंटवारे में उलझी गर्भवती महिलाएं उपेक्षा का शिकार हो रही है। परामर्श देने वाले यूनिट हैड के अवकाश एवं शहर से बाहर होने पर अन्य यूनिट के विशेषज्ञ मरीज की अनदेखी करते है।
राजस्थान पत्रिका टीम की पड़ताल में शनिवार को भी यह कड़वी सच्चाई सामने आई। गर्भवती महिलाओं के परिजनों ने डरते हुए सेवारत चिकित्सकों के ‘सौतले व्यवहार’ का आरोप लगाया। मामले में सुधार की बजाय महिला नर्सिंग सुपरवाइजर खामियां बताने वाले परिजनों को धमकाने से भी बाज नहीं आए। अपराह्न ढाई बजे वार्ड का राउंड करती हुई सुपरवाइजर को परिजनों से यह तक कहते सुना गया कि किसी और को कमी बताने का खमियाजा भर्ती मरीज को भुगतना होगा। दूसरी ओर, चिकित्सालय प्रशासन भी सच जानने के बजाय सफाई देने में जुट गया।
संभव नहीं ऐसा
यूनिट प्रभारी के नाम पर मरीजों से कोई भेदभाव नहीं होता। विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में अन्य यूनिट प्रभारी की जिम्मेदारी को लेकर लिखित आदेश जारी होते हैं। किसी ने गलत कहानी सुनाई होगी। कल मैं खुद इसकी जानकारी लूंगी।
डॉ. सुनीता माहेश्वरी, अधीक्षक, पन्नाधाय राजकीय महिला चिकित्सालय
वार्ड 8 में सिजेरियन के बाद स्थानांतरित चंपा (परिवर्तित नाम) की नजदीकी रिश्तेदार हेमलता ने बताया कि 10 अप्रेल को डॉ. संगीता सेन की यूनिट में उसकी गर्भवती का सामान्य चेकअप हुआ। ब्लड प्रेशर हाई बताकर उसके शिशु को खतरा बताया और वार्ड संख्या 11 में भर्ती कर दिया। बाद में जेल डालकर प्रसव दर्द होने की बात कही। उसे नियमित दर्द के बीच 12 अप्रेल की सुबह उसे ऑपरेशन के लिए बोला गया और सोनोग्राफी के साथ ही उसका खाना बंद करा दिया, लेकिन रात करीब 11 बजे तक उसे ऑपरेशन थियेटर में नहीं लिया गया। तब कहीं जाकर सिजेरियन से नवजात ने जन्म लिया। नर्सिंग कर्मचारी की ओर से उसे धमकाया गया है।
वार्ड 11 में भर्ती बेदला निवासी शीला दीक्षित (25) कहती है कि उसके गर्भ में 6 माह का भ्रुण है। उसकी धडकऩें चल रही हैं, लेकिन चिकित्सकों ने गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क में पानी भरने की बात कहते हुए गर्भपात कराने की सलाह दी। डॉ. संगीता सेन के अभाव में उनकी यूनिट के चिकित्सक ने जिंदगी का खतरा बताते हुए सोमवार को वार्ड 11 में भर्ती कर लिया। पहले बोला ऑपरेशन होगा। रात से ही खाने-पीने के लिए मना कर दिया। उसके अगले दिन ऑपरेशन नहीं करने की बात कही। अब शनिवार को सही परामर्श देने की बजाय गर्भवती और शिशु की जान को खतरा होना बता दिया गया। वह और पति कई बार रेजिडेंट से मिले, लेकिन गरीब की कोई सुनने वाला नहीं था।
Published on:
15 Apr 2018 01:16 pm
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