
सोशल मीडिया पर मी-टू मूवमेंट की धूम...उदयपुर की जांबाज बेटियां क्या बोलीं... देखिए..
भुवनेश पंड्या/ उदयपुर . आद्य शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र के दौरान इन दिनों सोशल मीडिया पर मी-टू मूवमेंट की धूम मची हुई है। इसके तमाम पहलुओं को देखते हुए पत्रिका रूबरू हुआ ऐसी जांबाज बेटियों से जो खुद समाज की हर बुराई से लडकऱ जीतने का जज्बा रखती है। जो समाज को नई दिशा देने के लिए हर कदम पर तैयार है। बात उन छात्रा एनसीसी कैडेट्स की है। उनकी आंखों में देश सेवा को लेकर हजार सपने हैं तो ज्वलंत मुद्दे ‘मी-टू’ को लेकर मन में सैकड़ों सवाल भी।
वर्षा जोशी
एनसीसी में कैडेट वारंट ऑफिसर वर्षा समाज को एक अलग रूप में देखती है। उनका मानना है कि यदि मन मजबूत है तो कोई बेटी कभी हार ही नहीं सकती। वर्षा ने 2014 में एनसीसी ज्वाइन किया था, 2016 में सी सर्टिफिकेट एयर विंग में ए ग्रेड से किया। कुल नौ कैंप करने वाली वर्षा का कहना है कि समाज का नजरिया गलत हो तो हर बात गलत लगती है। अभी नवरात्र में लड़कियों के कपड़ों पर हुए कमेंट्स पर भी वह नाराज है। वह कहती है कि मीटू मूवमेंट गलत नहीं है। यदि नारी मजबूत होगी तो देश भी मजबूत होगा। यदि किसी के भी साथ इस तरह की घटना हुई है तो उसे आगे आने का पूरा हक है। वर्षा आगरा में एशिया के सबसे बड़े पैराट्रेनिंग स्कूल में पेराशूट से जंप करने को लेकर ऑल इंडिया की बेस्ट कैडेट चुनी जा चुकी है।
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कोमल प्रजापत
एनसीसी में कैडेट सार्जेन्ट कोमल मानती है कि लड़कियों को इस तरह की बातों को छुपाना नहीं चाहिए। ऐसी बातें सामने आएंगी तो लड़कियों को संबल मिलेगा। हर लडक़ी को मजबूती से लडऩा होगा। मीटू मूवमेंट बिलकुल सही है। कोमल इंडियन एयर फोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बनना चाहती है। वह मानती है कि हर लडक़ी को चाहिए कि वह व्यक्ति को समझने का प्रयास भी करे। यदि किसी व्यक्ति के इरादे गलत हैं तो उसे पहले से समझ कर ज्यादा सतर्क हो सकती हैं। ऐसे मामलों में हर महिला, हर लडक़ी को पूरी मजबूती के साथ जुटना चाहिए, ताकि उसे न्याय मिल सके।
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राजश्री गांधी
कैडेट सार्जेन्ट राजश्री कहती है कि उन्होंने एनसीसी को केवल व्यक्तित्व विकास के लिए चुना था, लेकिन एनसीसी अब उनकी पूरी दिशा ही बदल गई है। एनसीसी ने निडर बना दिया है। वह इतनी शर्मिली थी कि बात ही नहीं कर पाती थी, लेकिन अब वह बिलकुल नहीं घबराती है। वह मीटू मूवमेंट को लेकर कहती है कि कोई भी महिला या लडक़ी अपनी बात कभी भी रख सकती है, उसे कोई यह नहीं कह सकता है कि अब क्यों कहा। हर लडक़ी को हिम्मत करनी ही होगी। समाज सुधार की शुरुआत भी यहीं से होगी। बंदूक को पहली बार पकडऩे में खूब डर लगा था, लेकिन अब आदत पड़ चुकी है।
Published on:
20 Oct 2018 02:56 pm

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