
उदयपुर . झीलों में गिरने वाली गन्दगी को रोकने और उनको साफ- सुथरा रखने के लिए हाईकोर्ट की ओर से जिला कलक्टर की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी की पहली बैठक ढाई माह बाद सोमवार को हुई जिसमें कई विषयों पर चर्चा हुई लेकिन कमेटी अध्यक्ष,कलक्टर के नहीं होने से बैठक इन निर्णयों पर मुहर नहीं लग सकी। सदस्यों ने नाराजगी जताई कि बैठक में समिति के अध्यक्ष नहीं थे। वैसे कलक्टर ग्रामीण विकास संबंधी संसदीय समिति के साथ थे।
कलक्ट्रेट में हुई इस पहली बैठक में यह चर्चा की गई कि हाईकोर्ट ने झीलों में गिरती गन्दगी को रोकने और झीलों के संरक्षण को लेकर जितने भी आदेश अब तक निकाले हैं, उनकी पालना की जाए। हाईकोर्ट के आदेशों की पालना के लिए संबंधितों को जिम्मेदारी दी जाए। बैठक में समिति सदस्य यूआईटी सचिव रामनिवास मेहता, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के बी.आर. पंवार, नगर निगम आयुक्त की तरफ से एक्सईएन मनीष अरोड़ा, एक्सपर्ट जी.पी. सोनी, अधिवक्ता प्रवीण खंडेलवाल व न्यायमित्र संजीत पुरोहित ने हिस्सा लिया। बैठक में पुरोहित जोधपुर से आए। इधर, अधिकारियों का कहना है कि जिला कलक्टर के नहीं होने से बैठक के निर्णयों को लेकर अभी कुछ नहीं कह सकते हैं। अगली बैठक में ही अब कुछ निर्णय हो पाएंगे।
फरवरी में बनाई थी कमेटी
हाईकोर्ट ने 2 फरवरी 2018 को बड़ा फैसला करते हुए उदयपुर की झीलों में गिरने वाली गन्दगी को निकालने और उनको साफ रखने के लिए अब जिला कलक्टर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि कमेटी झीलें देखेगी और उसकी समीक्षा करेगी। हाईकोर्ट ने स्वप्रेरणा याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि हम नियमित मॉनिटरिंग नहीं कर सकते हैं। इसके लिए कलक्टर के नेतृत्व में एक समिति बना रहे हैैं, जो इसको देखे और रिपोर्ट बनाए।
Published on:
24 Apr 2018 04:29 pm
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