
भुवनेश पण्ड्या/उदयपुर . मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि के बायोटैक विभाग के प्रोफेसर राजेश दुबे फिर से विवादों में आ गए हैं। विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर टिकमंचद ने आरोप लगाया कि प्रो दुबे उनकी फाइलें पहले की ही तरह रोक रहे हैं और विवि प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है। दूसरी ओर, प्रो दुबे ने आरोप को नकारते हुए इसे षड्य़ंत्र करार दिया। टिकमचंद का कहना है कि प्रो दुबे ने उन्हें पहले की तरह ही परेशान करना जारी रखा है। अवकाश तक स्वीकत नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें डीन बीएल आहुजा से अवकाश की स्वीकृति लेनी पड़ी। दुबे अन्य फाइल भी रोक रहे हैं। इसकी जानकारी उन्होंने उच्चाधिकारियों को भी दी है।
पूर्व में किया आत्महत्या का संदेश वायरल
असिस्टेंट प्रोफेसर टिकमचंद दाकल ने गत 31 अक्टूबर को खुद की परेशानी और विभाग में अकारण बनाए जा रहे दबावों का हवाला देते हुए आत्महत्या करने का संदेश सोशल मीडिया पर वायरल कर सनसनी मचा दी थी। संदेश में उन्होंने प्रो दुबे पर आरोप लगाया था कि वे हर काम में अडंगा लगाकर काम रोकना चाहते हैं। संदेश में आरोप लगाया कि उनके पास डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एण्ड टेक्नॉलोजी और यूजीसी के दो प्रोजेक्ट हैं जिनका बजट करीब 50 लाख रुपए है। दुबे बार-बार उन पर दबाव बनाने से ऐसा लग रहा है कि प्रोजेक्ट से कुछ फायदा लेना चाह रहे हो, लेकिन खुलकर बोल नहीं रहे। टिकमचंद ने इसके बाद एक और संदेश वायरल किया था।
प्रो दुबे का विवादों से पुराना नाता
प्रो. दुबे का विवादों के साथ पुराना नाता है। जोधपुर के जयनारायण व्यास विवि से एनओसी लिए बगैर 4 जुलाई को उन्होंने सुखाडिय़ा विवि में बायोटेक्नोलॉजी विभाग में प्रोफेसर पद के लिए आवेदन कर दिया। साथ ही उन्होंने विवि से आवेदन पत्र भी अग्रेषित नहीं करवाया। वे वहां एचआरडी केंद्र में कार्यरत संविदाकर्मी डॉ. श्वेता गहलोत से कार्यमुक्ति के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करवाकर रीलिव हो गए और सुविवि में ज्वाइनिंग दे दी ।
शुरू ही नहीं हुई जांच
टिकमचंद एवं प्रो दुबे के बीच खींचतान पर कुलपति प्रो जेपी शर्मा और रजिस्ट्रार एचएस भाटी ने अलग-अलग कमेटी बनाई थी, लेकिन दो माह बाद भी मामले की जांच ही शुरू नहीं हुई है।
&प्रो दुबे अब भी पहले की तरह फाइलें रोक रहे हैं। मेरी छुट्टियां रोक दी थी, मुझे डीन से लेनी पड़ी। अन्य फाइल भी रोक रहे हैं, पहले वाले मामले में अभी तक कुछ नहीं हुआ। — टिकमचंद, असि. प्रोफेसर
इनका कहना
मैं पांच तारीख से दिल्ली में हूं। मुझे एक फाइल का नाम बता दें जो रुकी है। ये आरोप गलत हैं।— प्रो. राजेश दुबे, बायोटैक विभाग, सुविवि
Published on:
15 Dec 2018 12:28 pm
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