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युवा अपनी ऊर्जा पहचानें और उसे सही दिशा मिल जाए तो हमारी प्रगति निश्चित : मुनि प्रमाण सागर

मुनि प्रमाण सागर बोले- स्वराज से सुराज की ओर ले जाने का दायित्व हम सभी का

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उदयपुर. नेमीनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के अंतर्गत नेमीनगर में हो रही धर्मसभा में विगत कई दिनों से समाजजन मुनि प्रमाण सागर के प्रवचनों का लाभ उठा रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर पत्रिका संवाददाता ने मुनि से समाज और राष्ट्र के उत्थान से जुड़े कई मुद्दों पर बात की।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर युवाओं का आह्वान करते मुनि प्रमाण सागर ने भारत के विकास का मॉडल प्राचीन भारत की मान्यताओं और परम्पराओं में निहित मानते कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र के कल्याण में देशप्रेम और बलिदान की भावना सर्वोपरि होती है। सरकारों सहित नागरिकों का दायित्व है कि स्वदेशी और स्वरोजगार जैसी लोक कल्याणकारी योजनाओं को अंगिकार कर आदर्श राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनें। भारतदेश को इंडिया कहने की बात पर वे अपने धर्मगुरु मुनि विद्यासागर का हवाला देते कहते हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर कौशल विकास, हथकरघा और स्वरोजगार जैसी योजनाओं पर विचार रखे। इस देश को इंडिया जैसे शब्द की बजाय भारत के नाम से विश्वगुरु का दर्जा मिले इसी में सबका हित निहित है। भगवान महावीर के अहिंसात्मक विचारों के प्रभाव से ही गांधीजी ने हमें स्वराज दिलाया। अब उसे सुराज की ओर ले जाने का दायित्व हम सबका है।

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शंका समाधान एक सफल मिशन
लगातार तीन साल के सफल अभियान के कारण शंका समाधान कार्यक्रम न केवल जैन समाज वरन् आमजन के लिए बड़ी उपलब्धी बनकर प्रेरक मिशन के रूप में सामने आया है। अनेक लोगों ने इससे जुड़कर व्यक्तिगत लाभ हासिल करने के अलावा दुर्भाव, नैराश्य भाव, भेदभाव और नकारात्मकता जैसी कमियों को साधने का काम किया।

आडम्बर और अनावश्यक खर्च उचित नहीं

यह सही है कि किसी भी कार्यक्रम की भव्यता के लिए आवश्यक खर्च न चाहते भी किए जाते हैं। लेकिन, ये सब बहुत मर्तबा आयोजन के प्रयोजन पर भी निर्भर करता है। हां, केवल आडम्बर अथवा दिखावे की प्रवृति के कारण अनाप-शनाप या गैरजरूरी खर्च नहीं किए जाने चाहिए। समाजजन को दिशा दिखाने और वैचारिक सम्मान के लिए मुनि प्रमाण सागर की लिखी 'दिव्य जीवन का द्वार' तथा 'लक्ष्य जीवन का' की तीन लाख से अधिक प्रतियां पहले ही सुर्खियां पा चुकी हैं। एेसे में हाल ही प्रकाशित पुस्तक 'चार बातें' की सफलता समय तय करेगा। आगामी 26 अगस्त से 5 सितम्बर तक आयोजित पर्यूषण पर्व के बारे में चर्चा करते वे बताते हैं कि जैन धर्म के इस महापर्व में क्षमा, सरलता, ब्रह्मचर्य, आराधना जैसे जीवन मूल्यों पर आधारित संस्कार शिविर आयोजित होंगे। इस मौके पर समिति अध्यक्ष कुंथू कुमार जैन, महेन्द्र टाया, जितेन्द्र गांगावत, राजेन्द्र-प्रकाश आखवत व शशिकांत शाह उपस्थित थे।

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