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नगर निगम के सफाईकर्मी ने आवासीय बस्ती में पाल रखे सूअर, लोग परेशान

शिकायत के बावजूद निगम व कलक्टर ने नहीं दिया था ध्यानकलक्टर भी दें समस्या निस्तारण पर पर्याप्त ध्यान

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उदयपुर. आवासीय बस्ती में pig farming से दुर्गन्ध, बीमारी व कीटाणु फैलने की शिकायत के बावजूद ध्यान नहीं देना नगर निगम को महंगा पड़ गया। न्यायालय ने निगम को 15 दिन में न्यूसेंस हटाकर कोर्ट में रिपोर्ट तलब की है तथा इस अवधि में काम नहीं करने पर प्रतिदिन दो हजार रुपए अतिरिक्त हर्जाना भी लगाया। साथ ही जिला कलक्टर से भी कहा कि वे पब्लिक न्यूसेंस से संबंधित प्राप्त शिकायतों की निस्तारण रिपोर्ट सम्पर्क पोर्टल पर डालकर इतिश्री नहीं करें बल्कि पालना एवं समाधान पर भी पर्याप्त ध्यान दें।

स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व बृजेन्द्र सेठ ने उक्त निर्णय बंजारा बस्ती, हिरण मगरी सेक्टर-5 निवासी लीलाबाई चौहान, बबली राठौड़ व अन्य क्षेत्रवासियों की ओर से दायर परिवाद में दिया। वाद में भूखंड मालिक कमल मोट, उसके भाई राजेश मोट, राज्य सरकार जरिये जिला कलक्टर व नगर निगम जरिये आयुक्त को प्रतिवादी बनाया था। भूखंड मालिक के नगर निगम में ही सफाई कर्मी होने से वह इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा था। प्रकरण की सुनवाई के दौरान भी निगम को दो बार नोटिस भेजने के बावजूद वहां से कोई उपस्थित नहीं हुआ।

यह था मामला
क्षेत्रवासियों ने बताया कि बंजारा बस्ती के खाली पड़े भूखंड संख्या 154 पर सफाईकर्मी कमल व उसका भाई राजेश pig farming पालने का कार्य करते हैं। यह भूखंड आवासीय बस्ती में है और इसके चारों ओर परिवादियों के मकान है। pig farming पालन से परिवादियों एवं उनके परिजनों का रहना दुभर हो गया है। पूरा भूखंड सूअरों के मल एवं गंदगी अटा पड़ा है। दुर्गन्ध से घरों में सांस भी दुश्वार है। कीटाणुओं से उनके परिजन आए दिन बीमार रहते हैं, वहीं बस्तीवासियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। पूर्व में एक बालिका गृष्टि पुत्री राहुल चौहान की बीमारी से मौत भी हो गई।जनप्रतिनिधियों, पुलिस व प्रशासन को सूचना दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं गई। क्षेत्रीय पार्षद, नगर निगम के समस्या पर ध्यान नहीं देने पर जिला कलक्टर को शिकायत की, जिसे समाधान के लिए नगर निगम को भेजा गया लेकिन किसी कर्मचारी व अधिकारी ने आज तक मौके की सुध नहीं ली।

टिप्पणी : आम आदमी को स्वास्थ्यवर्धक जीवन जीने का अधिकार
विधायिका की ओर से बनाए गए नियम प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्यवर्धक जीवन शैली जीने का अधिकार प्रदान करते हैं। जिस संस्था व उसके अधिकारी आम व्यक्तियों की शिकायत के निराकरण पर कोई ध्यान नहीं देते हैं तो निसंदेह अपराध की परिभाषा एक्ट ऑफ ओमिशन में आते हैं। ऐसे अधिकारी की विधिक दायित्व व कर्तव्यों के प्रति उपेक्षा भी आपराधिक एवं गैर जिम्मेदारना कृत्य में शामिल हो जाती है। ऐसे में आम व्यक्ति अपने जीवन के अधिकार से संबंधित संरक्षण के लिए ऐसे गैर जिम्मेदार व गैर उत्तरदायी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए समय पर संबंधित सक्षम न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर आगाह करें।