
ambamata mandir
उदयपुर. नवरात्र में मां अम्बिका के नौ रूपों की पूजा-आराधना का विधान है। मां को शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। भक्त शक्ति-स्वरूपा की पूजा-आराधना कर सभी संकट, रोग, दुश्मन व प्राकृतिक-अप्राकृतिक आपदाओं से बचने का आशीर्वाद मांगते हैं, इसलिए मां अपने भक्तों को आशीर्वाद देने जगह-जगह अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं। मेवाड़ में भी देवी-शक्तियों के कई प्राचीन व महत्वपूर्ण स्थल हैं, जिनकी देखरेख एकलिंगजी ट्रस्ट के माध्यम से की जा रही है।
अम्बामाताजी, उदयपुर
उदयपुर के प्रमुख शक्तिस्थल के रूप में विख्यात अम्बा माताजी की प्रतिष्ठा संवत 1721 में हुई थी। मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा राजसिंह प्रथम ने अम्बामाता की प्रतिमा आरासण (गुजरात) से लाकर यहां प्रतिष्ठापित करवाई थी। दोनों नवरात्र के साथ ही यहां वर्ष पर्यन्त एकलिंगजी ट्रस्ट की ओर से विशेष पूजा-अर्चना की व्यवस्था है। समय-समय पर मेवाड़ के लगभग सभी महाराणा यहां दर्शनार्थ पधारते रहे हैं। महाराणा जवान सिंह माता के अनन्य उपासक थे। नवरात्र की पंचमी को महाराणा शाम 5 बजे पूर्ण लवाजमे के साथ व देवी के दर्शन को पधारते थे।
दशमुखा कालिका माताजी (श्री एकलिंगजी परिसर)
परमेश्वराजी महाराज एकलिंगजी मंदिर परिसर में ही अम्बा माताजी के समीप दशमुखा कालिका माताजी का मंदिर है। दशभुजा तथा दशमुखा कालिका माता श्याम शिला पर उत्कीर्ण हैं। दश महाविद्याओं में कालि प्रथम विद्या है, अत: तांत्रिक जगत में आद्याशक्ति की संज्ञा से अभिहित है। एकलिंगजी ट्रस्ट द्वारा यहां दोनों नवरात्र मनाई जाती हैं। मां अम्बिका एवं कालिकामाता सहित यहां स्थित तीनों मंदिरों का हाल ही में अरविन्द सिंह मेवाड़ ने जीर्णोद्धार करवाया है, जिससे इनका स्वरूप निखर आया है।
शीतलामाता मंदिर, उदयपुर
महाराणा संग्राम सिंह (द्वितीय) ने उदयपुर के देलवाड़ा की हवेली के पास शीतलामाता का मंदिर बनवाया। जब बालकों को चेचक निकलती हैं तो गृहणियां शीतला माता की पूजा करती हैं। ठण्डा नैवेद्य भोग लगाती हैं और ठण्डा खाती हैं। इससे शरीर में शांति होकर रोगी इस रोग से मुक्त हो जाते हैं।
चौथमाताजी (जनाना महल)
उदयपुर के राजमहलों में जनाना महल के पश्चिम अहाते में चौथमाताजी की देवरी बनी हुई है, जिसमें चौथमाताजी स्थापित है। देवरी में जो कांच लगाए गए हैं वे महाराणा स्वरूपसिंह एवं महाराणा सज्जन सिंह के समय के लगाए जाने का विवरण मिलता है।
हस्तीमाताजी, उदयपुर
उदयपुर में अवस्थित हस्तीमाता जी भी मेवाड़ के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल हैं। मेवाड़ के महाराणा कर्णसिंह (वि.सं. 1620-28) के शासनकाल में निर्मित यह मंदिर उदयपुर-चित्तौडगढ़़ मार्ग पर महाराणा भूपाल महाविद्यालय के पीछे स्थित है। श्री हस्तीमाताजी देवी दुर्गा का ही एक स्वरूप हैै। महाराणा प्रत्येक नवरात्रि की सप्तमी के दिन देवी दर्शन के लिए पधारते थे। यह मंदिर भी एकलिंगजी ट्रस्ट के स्वामित्व का है तथा ट्रस्ट की ओर से यहां नियमित सेवा-पूजा करवाई जाती है। दोनों नवरात्र के अवसर पर ट्रस्ट की ओर से नौ दिन तक विशिष्ट अनुष्ठान एवं यज्ञादि सम्पन्न करवाए जाते हैं। हाल ही में इस मंदिर का एकलिंगजी ट्रस्ट की ओर से जीर्णोद्धार करवाया गया है।
अम्बामाताजी (श्रीएकलिंगजी परिसर)
- कैलाशपुरी स्थित परमेश्वराजी महाराज एकलिंगजी मंदिर परिसर में मुख्य दक्षिण द्वार के बाहर कुछ ऊंचाई पर अवस्थित तीन मंदिरों में से एक श्वेत पाषाण निर्मित मां अम्बिका की चतुर्भज प्रतिमा विराजमान है। मां अंबे का यह रूप अत्यंत ही सौम्य व मनोहारी है।
Published on:
08 Oct 2021 04:16 pm
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