
उदयपुर के सुथारवाड़ा में देवी प्रतिमा के विसर्जन जुलूस में एक डोर बंधे चार ढोल संग नृत्य करता पंजाब से आया लोक कलाकार

निगम की ओर से बनाये गये कुंड पर अपने कर्मचारियों को लगाया गया ताकि प्रतिमा के विसर्जन के बाद मूर्ति को वहां से ले जाकर तय स्थान पर रख सकें

शारदीय नवरात्र शुक्रवार को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुए

आरती के बाद जुलूस रवाना हुआ

नौ दिनों तक शहर में अलग अलग जगहों पर माताजी के समक्ष गरबे के आयोजन के बाद प्रतिमा विसर्जन के साथ मां को विदाई दी गई

निगम की ओर से बनाये गये कुंड पर अपने कर्मचारियों को लगाया गया ताकि प्रतिमा के विसर्जन के बाद मूर्ति को वहां से ले जाकर तय स्थान पर रख सकें

मिट्टी की मूर्ति के विसर्जन से झीलों को नुकसान नहीं होता है वहंी धातु की मूर्ति का प्रतीकात्मक रूप से विसर्जन लोग फिर से अपने साथ ले गए