
कृष्णा तंवर/उदयपुर. शारदीय नवरात्र शुक्रवार को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुए। नौ दिनों तक शहर में अलग अलग जगहों पर माताजी के समक्ष गरबे के आयोजन के बाद प्रतिमा विसर्जन के साथ मां को विदाई दी गई। घरों में, पांडालों में और कई जगहों पर स्थापित की गई प्रतिमाओं को लोग नाचते गाते और ढोल नगाड़ों के साथ लेकर कुंड तक पहुंचे। इस दौरान कई लोगों ने डांडिया रास भी किया तो प्रतिमा के विसर्जन से पहले पूजा-अर्चना की गई। निगम की ओर से बनाए गए कुंडों पर प्रतीकात्मक रूप से माताजी की प्रतिमा को विसर्जित किया गया। दरअसल हाईकोर्ट के आदेश के बाद झीलों में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी गई जिसके बाद नगर निगम की ओर से शहर के अलग अलग हिस्सों में कुण्ड बनाये गये ताकि लोग वहां पर आकर प्रतिमाओं का विसर्जन कर सकें। निगम की ओर से बनाये गये कुंड पर अपने कर्मचारियों को लगाया गया ताकि प्रतिमा के विसर्जन के बाद मूर्ति को वहां से ले जाकर तय स्थान पर रख सकें। इस बार खास बात यह रही कि पीओपी की मूर्तियों के साथ साथ मिट्टी ओर धातु की मूर्तिया भी दिखाई दी। मिट्टी की मूर्ति के विसर्जन से झीलों को नुकसान नहीं होता है वहंी धातु की मूर्ति का प्रतीकात्मक रूप से विसर्जन लोग फिर से अपने साथ ले गए।