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कुर्सी पर बैठने से नहीं चलेगा काम, बच्चों के नामांकन के लिए अब दौडऩा होगा अफसरों को

उदयपुर. अब बच्चों को स्कूल लाने के लिए शिक्षकों के साथ ही जिला शिक्षा अधिकारियों और अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी को भी फील्ड में दौडऩा होगा।

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भुवनेश पण्ड्या / उदयपुर . अब बच्चों को स्कूल लाने के लिए शिक्षकों के साथ ही जिला शिक्षा अधिकारियों और अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी को भी फील्ड में दौडऩा होगा। यदि कोई परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं होता है तो सरपंच व वार्डपंच को साथ लेकर उसके घर जाकर तब तक भ्रमण करना होगा जब तक प्रवेश न हो जाए। पूर्व की भांति केवल कुर्सी पर बैठने से काम नहीं चलेगा। इस बार प्राथमिक से माध्यमिक स्कूलों में प्रवेशोत्सव को लेकर सरकार का विशेष जोर है। इसे लेकर सरकार ने विद्यालयों के वर्ष 2018 के लिए त्रि-स्तरीय व्यवस्था बनाई है। इसमें सबसे पहले पीईईओ, डीईओ और बाद में निदेशालय स्तर पर पर कार्ययोजना तय की गई है।

अस्थायी प्रवेश देकर शिक्षण कार्य शुरू
सत्र 18-19 के लिए सभी स्कूलों में विद्यार्थियों को अस्थाई प्रवेश देकर शिक्षण कार्य शुरू हो चुका है। इसमें नए व ड्रॉप आउट विद्यार्थियों के नामांकन के लिए प्रवेशोत्सव 26 अप्रेल से शुरू होगा।


ऐसे होगा काम
पीईईओ स्तर: पीईईओ के पास सभी स्कूलों के लिए हाउस होल्ड सर्वे में अनामांकित बच्चों की सूची, कक्षावार, आंगनबाड़ीवार तैयार करनी है। देखना होगा कि पहले पढ़ चुके बच्चे, जो अब बाहर हैं, प्रवेश नहीं ले पाए हैं और ड्रापआउट हो गए हैं। उन्हें क्षेत्र के स्कूल में भर्ती करवाना होगा। पीईईओ स्वयं ऐसे बच्चों के घरों पर जाएंगे और सर्वे कर उन्हें स्कूल लाने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करेंगे।

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वे एसडीएमसी, विद्यार्थी परिषद के पूर्व सदस्यों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पंचायत सहायक को साथ रखेंगे। रिपोर्ट डीईओ को देंगे। भ्रमण के बाद भी प्रवेश नहीं लेने वाले बच्चे हार्डकोर माने जाएंगे। उन्हें लेकर 30 अप्रेल को होने वाली एसडीएमसी/अध्यापक-अभिभावक परिषद बैठक के साथ चर्चा होगी। जब तक बच्चे का प्रवेश नहीं होता जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर घर पहुंचेंगे। प्रक्रिया प्रवेश तक जारी रहेगी।


पोस्टर चस्पाएं और प्रेरित करें: देखेंगे कि कहां पर ग्रामीणों की आवाजाही अधिक है। ऐसे में सरकारी स्कूलों की सुविधाओं से लेकर छात्रवृत्ति योजनाएं व प्रोत्साहन करने की पूरी जानकारी पोस्टरों के माध्यम से चस्पा करवाएं।
डीईओ स्तर: प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी के पास क्षेत्राधिकार के सभी स्कूलों का कक्षा समूहवार निर्धारित नामांकन लक्ष्य दिया गया है। डीईओ कार्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। वहां का दैनिक अपडेट करवाना होगा। जिले के जिन स्कूलों में हार्डकोर बच्चों की संख्या अधिक सामने आती है तो वहां पीईईओ के साथ स्वयं डीईओ को जाना होगा। डीईओ इसकी जानकारी एसएसए और रमसा के राज्य कार्यालय के जिला प्रभारी को देंगे।


निदेशालय स्तर: निदेशालय स्तर पर प्रवेशोत्सव कार्यक्रम प्रभारी मूलचंद मीणा को बनाया गया है। वे सह प्रभारियों के साथ प्रत्येक जिले के नियंत्रण कक्ष से सम्पर्क कर नियमित अपडेट करते रहेंगे। उपनिदेशक, डीईओ पीईईओ से सैम्पल चर्चा करेंगे। निदेशक नथमल डिडेल ने निर्देश दिए है कि यह केवल औपचारिकता नहीं रहे इसका भी ध्यान रखना होगा। जिला स्तरीय अधिकारी जरूरत पर स्वयं निदेशालय को सूचना देते रहेंगे।