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उदयपुर

video: यहां नवजातों की ज‍िंंदगी पर मंडरा रहा हर पल खतरा, नर्सरी आईसीयू दे रहा बीमारियों को दावत

नर्सरी वार्ड में टूटे हुए फर्श , केनुला लगाते समय नहीं बरती जाती है सावधानी, परिजनों के लिए दो बार हाथ धोने की नहीं अनिवार्यता

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डॉ सुशील सिंह चौहान/ उदयपुर . संभाग के सबसे बड़े बाल चिकित्सालय में नवजातों की जिंदगी पर संक्रमण का संकट गहराया हुआ है। नाजुक हाल में जन्मे नवजातों की जिंदगी बचाने के नाम पर गहन चिकित्सा इकाई ‘नर्सरी’ में फर्श से लेकर अर्श तक बीमारियों को बढ़ाने वाला खेल हो रहा है। प्रशासनिक ओहदेदारों के साथ नर्सिंग स्टाफ तक समस्या से अवगत हैं। जागरूक कार्मिकों की ओर से समस्या समाधान को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग को लिखा जा चुका है, लेकिन विभागीय लापरवाही बच्चों की जिंदगी पर इस कदर भारी है कि नर्सरी वार्ड में फर्श पर टूटी हुई टाइल्सों को दुरस्त करने के लिए भी बजट का इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा प्रोपर वेंटीलेशन के अभाव में भी वार्ड में बीमारियों का जन्म हो रहा है।

 

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फस्ट फ्लोर पर तो नर्सरी के मुख्य द्वार पर कांच का दरवाजा टूटने के बाद उसे पुन: लगाने के प्रयास तक नहीं किए गए। कमोवेश बड़े बच्चों की गंभीर बीमारी वाले पीआईसीयू वार्ड भी कुछ एेसी ही परेशानियों से जूझ रहा है। गौरतलब है कि महाराणा भूपाल चिकित्सालय के अधीन संचालित इस इकाई में कुल ६ नर्सरी और एक पीआईसीयू संचालित है। यहां प्रतिदिन करीब क्रमश: 170 और 16 गंभीर बच्चों की भर्ती का क्रम जारी रहता है। नहीं बरतते एहतियात आलम यह है कि नर्सरी वार्ड मेें एहतियात के नाम पर भी असावधनी बरती जाती है। कायदे से बच्चे को उठाने और वार्ड के भीतर पहुंचने वाले लोगों के लिए बाहर नल से दो बार हाथ धोना अनिवार्य होता है, लेकिन अव्यवस्था यह है कि परिजनों के हाथ धोने के लिए यहां साबुन की सुविधा ही नहीं है। नर्सिंग स्टाफ परिजनों को दो बार हाथ धोने की सलाह भी नहीं देता है। इसी तरह प्रोपर वेंटीलेशन को लेकर कमी है। आमतौर पर यहां वातानुकूलित यंत्रों को बंद कर दिया जाता है। एेसे में शुद्ध हवा का संकट बन जाता है। फर्श पर टूटी टाइल्स के कारण फिनाइल का पोछा सही से नहीं घूमता। एेसे में संक्रमण फैलाने वाले जीवाणु वहीं घूमते रहते हैं। नवजात को इंजेक्शन लगाने के दौरान लेमिनार एयर फ्लो की पालना हर नर्सेज कार्मिक के स्तर पर नहीं होती। बच्चों को स्तनपान कराने से उनके जल्दी स्वस्थ होने की उम्मीद रहती है, लेकिन फीडिंग के लिए बार-बार उन्हें जाने से रोका जाता है। पीआईसीयू में भी टूटी टाइल्स का संकट है।

 

पीडब्ल्यूडी की निविदा समस्या को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पूरे सुधार के प्रयास रहते हैं। व्यवस्था सुधार को लेकर निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी हैं। पीडब्ल्यूडी की ओर से संवेदक को कार्य आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। जल्द ही व्यवस्थाएं दुरस्त की जाएंगी।

डॉ. सुरेश गोयल, अधीक्षक, बाल चिकित्सालय