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Rajasthan News: राजस्थान में ग्रेजुएशन की तुलना में 50% विद्यार्थी भी नहीं कर रहे पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स

2021-22 में राज्य के विश्विद्यालयों और इनसे संबद्ध कॉलेजों में स्नातक करने वाली 158671 छात्राओं में से 75295 यानी 47.48 प्रतिशत ने ही स्नातकोत्तर में दाखिला लिया।

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रुद्रेश शर्मा
सत्र 2021-22 में राजस्थान के विभिन्न सरकारी कॉलेजों से स्नातक करने वाली मात्र 47.48 प्रतिशत छात्राओं ने स्नातकोत्तर में प्रवेश लिया, जबकि छात्रों में यह आंकड़ा सिर्फ 30.98 फीसदी ही रह गया है। यानी राज्य में हर साल अलग-अलग संकाय में स्नातक (ग्रेजुएशन) करने वाले विद्यार्थियों में से 50 फीसदी भी अधि-स्नातक (पोस्ट ग्रेजुएशन) शिक्षा ग्रहण नहीं कर रहे।

इसका प्रमुख कारण प्रदेश में क्षेत्रवार कॉलेजों की संख्या का असंतुलन माना जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से पिछले दिनों जारी रिपोर्ट ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (एआइएसएचइ)-2021 के मुताबिक राजस्थान के 3934 कॉलेजों में से 1033 केवल जयपुर और सीकर जिले में स्थित है। जाहिर है कि राज्य के अन्य क्षेत्रों में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के उतने अवसर नहीं मिल रहे, जितने मिलने चाहिए।

केंद्र सरकार की रिपोर्ट के बाद देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (जीइआर) बढ़ाने के जतन किए जा रहे हैं। इसके तहत वर्ष 2029 तक जीइआर को 39 तथा 2035 में 50 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है। न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 के प्रकाश में अब वे कारण तलाशे जा रहे हैं, जिनका निराकरण कर उच्च शिक्षा के उन्नत लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

2021-22 में राज्य के विश्विद्यालयों और इनसे संबद्ध कॉलेजों में स्नातक करने वाली 158671 छात्राओं में से 75295 यानी 47.48 प्रतिशत ने ही स्नातकोत्तर में दाखिला लिया। जबकि 287651 में से सिर्फ 89138 छात्रों ने पोस्ट ग्रेजुएशन में रुचि दिखाई। विशेषज्ञों ने पाया कि राजस्थान के सुदूर इलाकों के कॉलेजों में स्नातकोत्तर कार्यक्रमों का संचालन कर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।

राज्य छठे स्थान पर

एआइएसएचइ रिपोर्ट के मुताबिक उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र पंजीयन के मामले में राजस्थान का देश में छठा स्थान है। वहीं जयपुर-सीकर उन दस शीर्ष जिलों में हैं, जहां देश के सर्वाधिक कॉलेज हैं। सामान्य शिक्षा में देश के अन्य राज्यों से बेहतर होने के बावजूद प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर को उठाए जाने की जरूरत है।

प्रदेश में उच्च शिक्षण संस्थानों की दरकार

राजस्थान के संबंध में रिपोर्ट का कहना है कि प्रदेश में उच्च शिक्षण एवं शोध संस्थानों तथा विकास संस्थाओं की कमी है। यहां हायर लर्निंग, सेंटर फॉर एक्सीलेंस, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड इनोवेशन व आधारभूत सुविधाओं के साथ स्टेट ऑफ आर्ट जैसे संस्थानों की दरकार है। वहीं, साइंस व कॉमर्स एवं मैनेजमेंट में रिसर्च के लिए सेंटर फॉर एक्सीलेंस, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत एवं अध्ययन के लिए हेरिटेज संरक्षण केंद्रों, छात्राओं के लिए आवासीय कॉलेजों, दक्षिण राजस्थान में केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की आवश्यकता है।

सुदूर इलाकों के बनाएं जाएं कॉलेज

2021-22 में राज्य के विश्विद्यालयों और इनसे संबद्ध कॉलेजों में स्नातक करने वाली 158671 छात्राओं में से 75295 यानी 47.48 प्रतिशत ने ही स्नातकोत्तर में दाखिला लिया। जबकि 287651 में से सिर्फ 89138 छात्रों ने पोस्ट ग्रेजुएशन में रुचि दिखाई। विशेषज्ञों ने पाया कि राजस्थान के सुदूर इलाकों के कॉलेजों में स्नातकोत्तर कार्यक्रमों का संचालन कर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।

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उच्च शिक्षा में पंजीयन वाले शीर्ष 10 राज्य

  • उत्तर प्रदेश 69,73,424
  • महाराष्ट्र 45,77,843
  • तमिलनाडु 33,09,327
  • मध्यप्रदेश 28,00,165
  • पश्चिम बंगाल 27,22,151
  • राजस्थान 26,89,340
  • बिहार 26,22,946
  • कर्नाटक 24,36,540
  • गुजरात 17,97,662
  • तेलंगाना 15,96,680

इंडस्ट्रीज से जुड़ाव हो

कौशल विकास के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए शिक्षण संस्थानों का इंडस्ट्रीज और एनजीओ से जुड़ाव होना आवश्यक है। वहीं, विज्ञान के क्षेत्र में प्रयोगशालाओं के सुदृढीकरण के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है।

  • प्रो. के बी जोशी, अधिष्ठाता, मोलासुविवि, उदयपुर

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