
चंदनसिंह देवड़ा/ उदयपुर . विधानसभा चुनाव 2013 में उदयपुर जिले की गोगुंदा और झाड़ोल विधानसभा सीट पर नोटा इतना भारी पड़ा कि जीत-हार का अंतर नोटा से कम था। ऐसे में इस बार दोनों ही दलों के प्रत्याशी नोटा के सोटा से बचने की रणनीति बनाकर मैदान में डटे हुए हैं। प्रत्याशी अपने कार्यकर्ताओं से यह कहते दिख रहे हैं कि जितने भी मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाओ, उन्हें चुनाव चिह्न सही से समझाने में भूल मत करना।
विधानसभा चुनाव 2013 में गोगुंदा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मांगीलाल गरासिया भाजपा के प्रताप भील से 3345 वोट से हार गए थे। इस क्षेत्र के 5893 मतदाताओं ने नोटा स्विच दबाया था यानी जीत-हार के अंतर से करीब दोगुने वोट नोटा पर पड़े। गरासिया को अब भी इस हार की कसक है। कांग्रेस ने जिले में एकमात्र झाड़ोल सीट जीतकर नाक बचाई। कांग्रेस के हीरालाल दरांगी ने भाजपा के बाबूलाल खराड़ी को 4 हजार 684 वोट से शिकस्त दी थी। बाबूलाल इस हार को इसलिए नहीं भूले हैं क्योंकि उनको जितने वोटों से हार मिली, उससे करीब डेढ़ गुणा यानी 6 हजार 838 वोट नोटा पर पड़े थे।
कम आंकना हो सकती है भूल
इस बार विधानसभा चुनाव में नोटा के पिछले आंकड़ों को अनदेखा करना बड़ी भूल हो सकती है। वर्ष 2013 में नोटा ने हरेक विधानसभा क्षेत्र में धाक जमाई थी। इस बार भी कई सीटों पर कांटे के मुकाबलों में नोटा हार-जीत की गणित को बिगाड़ सकता है।
यह है नोटा
नन ऑफ द एबव यानी उपरोक्त में से कोई नहीं। भारत निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव 2013 में इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन में नोटा का बटन दिया गया था। वर्ष 2015 में नोटा पूरे देश में लागू किया गया। यह बटन सबसे आखिरी में होता है। नोटा सबसे ज्यादा वोट हासिल करता है तो उस जगह पर चुनाव दोबारा करवाना होता है।
विधानसभा चुनाव 2013 में इतनों ने चाहा नोटा
विधानसभा क्षेत्र...जीत का अंतर...नोटा
गोगुंदा 3345..5893
झाड़ोल 4684...6838
खेरवाड़ा 11166..5978
उदयपुर ग्रामीण 13764...4590
उदयपुर शहर 24608...2860
मावली 23465...3547
वल्लभनगर 13167...4764
सलूम्बर 36651...5267
राजसमंद में भी चला था नोटा का सोटा
नाथद्वारा 12472..4415
भीम 18451...2680
कुंभलगढ़ 27606...3255
राजसमंद 30575...3083
Published on:
26 Nov 2018 02:15 pm
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