29 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान के इस वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार दिखा पेंटेड स्पर फाउल (तीतर) नाम का पक्षी, माना जाता है शुभ संकेत

Rajasthan News: उदयपुर के कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में पेंटेड स्पर फाउल पक्षी पहली बार देखा गया है। आमतौर पर यहां अरावली रेड स्पर फाउल अच्छी संख्या में दिखता है।

less than 1 minute read
Google source verification
painted_spurfowl_in_kumbhalgarh_wildlife_sanctuary.jpg

Rajasthan News: उदयपुर के कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में पेंटेड स्पर फाउल पक्षी पहली बार देखा गया है। आमतौर पर यहां अरावली रेड स्पर फाउल अच्छी संख्या में दिखता है। लेकिन पेंटेड स्पर फाउल का दिखना कुंभलगढ़ और यहां की बायोडायवर्सिटी के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। पेंटेड स्पर फाउल के यहां से देखे जाने बारे में कई बार बातें हुई, लेकिन दस्तावेजी रेकॉर्ड पर अभी तक नहीं था।

उदयपुर पक्षी महोत्सव के दौरान पक्षी विशेषज्ञ अनिल रोजर्स के नेतृत्व में एक टीम राजसमंद आई थी। टीम ने कुंभलगढ़ के आरेट क्षेत्र में ट्रेकिंग की तो जंगल में पेंटेड स्पर फाउल का जोड़ा नजर आया। रोजर्स ने बताया कि यहां पेंटेड स्पर फाउल का दिखना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यह रणथम्भौर और सरिस्का में तो दिखता है, मगर कुंभलगढ़ से अभी तक इसकी ऑफिशियल रिकॉर्डिंग नहीं थी।

यह भी पढ़ें : रणथम्भौर में बाघों के साथ-साथ सवाईमाधोपुर में है कछुओं की भी शरण स्थली, जानिए क्यों

तीतर प्रजाति का प्रक्षी
यह तीतर परिवार का पक्षी है, जो मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत में चट्टानी पहाड़ी और झाड़ीदार जंगलों में पाया जाता है। नर अधिक चमकीले रंग के होते हैं और सफेद रंग में स्पष्ट रूप से देखे जाते हैं। यह झाडिय़ों में जोड़े या छोटे समूहों में पाया जाता है। इस प्रजाति का पक्षी राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के कुछ हिस्सों, मध्य भारत की पहाडिय़ों (पचमढ़ी) और दक्षिणी भारत की चट्टानी पहाडिय़ों और शुष्क वन क्षेत्रों में पाया जाता है। इन्हें आंध्रप्रदेश के पूर्वी घाट के नल्लामाला क्षेत्र में भी दर्ज किया गया। यह जामुन के साथ-साथ कीड़े और फूल (मधुका लोंगिफोलिया) खाते हैं। सुबह-सुबह जलाशयों में जाते हैं। इनका प्रजनन काल जनवरी से जून होता है।