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बोरिया गांव में फिर आया पैंथर, ग्रामीणों में दहशत

खेत पर रखवाली करने गए किसानों ने देखा पैंथर, भागकर बचाई जान वन विभाग की टीम पहुंची और लगाया पिंजरा

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बोरिया गांव में फिर आया पैंथर, ग्रामीणों में दहशत

पैंथर से बचाव के लिए लट्ठ लेकर तैनात ग्रामीण।

उदयपुर. जिले के बोरिया गांव में दो दिन पूर्व एक पैंथर ने आबादी क्षेत्र में घुसकर पांच जनों को घायल कर दिया व करीब सवा छह घंटे तक उत्पात मचाया था। देर रात रेस्क्यू करने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ही ली कि दूसरे ही दिन फिर से एक अन्य पैंथर अपने साथी पैंथर की तलाश में आ गया, जिससे ग्रामीण दहशत में आ गए। इधर पांचों घायलों को अस्पताल से छुट्टी दी गई है, लेकिन उपचार जारी है।

डेयरी के सामने नदी के दूसरे छोर स्थित खेत पर रात के समय किसान नाथूलाल, प्रकाश, लालुराम पटेल फसलों की रखवाली के लिए गए तो कोट के अहाते में पैंथर बैठा देख भागकर जान बचाई। जैसे ही यह सूचना गांव में पहुंची तो ग्रामीण सहम गए। इधर, सूचना पर वन विभाग की टीम शनिवार को पिंजरा लेकर पहुंची और बताए गए स्थान की ओर पिंजरा लगाया गया और वनकार्मिकों ने गश्त की और ग्रामीणों को सजब रहने की सलाह दी। वहीं शनिवार को कुराबड़ क्षेत्र के आवरा, जमून, सोमाखेडा क्षेत्र में भी पैंथर ने मवेशियों का शिकार किया, ग्रामीणों ने इन गांवों में भी पैंथर को पकडने की मांग की है। बताया गया कि पैंथर के हलमे में चाचा- भतीजा भेरा पटेल व जगदीश गंभीर रूप से घायल हुए है।
असली पैंथर देखने की चर्चा रही

रेस्क्यू टीम के पहुंचने पर गांव के ग्रामीण, युवा लटट लेकर घेरा डालने पहुंच गए और पैंथर को घेरने लगे लेकिन पैंथर पूंजाराम पटेल के घर के बाद बाबूलाल के बाडे के पिछवाडे चारे के दो कुंन्दुवे के बीच दुबक कर बैठा रहा। बाहर ग्रामीणों हो हल्ला होने के बावजूद नहीं निकला, लेकिन रात में रेस्क्यू टीम ने उसे पकड़ा तो ग्रामीण समीप पहुंच कर देखते रहे।

दोनों वनकर्मी नहीं, बल्कि वन ग्राम समिति के सदस्य थे
दो युवकों के साथ पैंथर का मुकाबला चलता रहा। वे दोनों वन कर्मी के बजाय वन संरक्षण के लिए बनाई गई वन ग्राम समिति के सदस्य थे। जिनके पास केवल वन सुरक्षा के तहत कुल्हाडी जैसे ही हथियार थे। ऐसे में निहत्थे थे। मौके पर पहुंचने पर उन पर हमला कर दिया, तो कुछ देर तक संघर्ष भी चला।