
हंसराज सरणोत /उदयपुर- फलासिया पंचायत समिति क्षेत्र के मादडी में मंगलवार को अस्सी वर्षीय वृद्ध ने अडतालीस वर्षो से लिव इन रिलेशन में साथ रह रही छहत्तर वर्षीय वृद्धा से सामाजिक रिति रिवाज अनुसार शादी की रस्म अदा की । इस दौरान इनके पुत्र-पुत्रियां भी परिवार सहित मौजूद रहे । परिवार के सौलह सदस्यों की मौजूदगी में अदा हुई इस भांजणा रस्म की चर्चा मंगलवार दिन भर पूरे क्षेत्र में होती रही । हालांकि वृद्ध की पहली पत्नी बिमारी के कारण इस रस्म अदायगी में शामिल नहीं हो सकी ।
ये अजब-गजब घटनाक्रम मंगलवार को फलासिया पंचायत समिति क्षेत्र की मादडी पंचायत के पारगियापाडा गांव में हुआ । फलासिया की ही खरडिया पंचायत के नला छोटा निवासी अस्सी वर्षीय वृद्ध देवादास पुत्र दीता राम कलासुआ की पहली पत्नी चम्पा बाई के साथ होने के बावजूद अडतालीस वर्षो पूर्व मादडी पंचायत के खरडिया निवासी मगदु बाई को भगाकर ले आए थे । इसके बाद से ही देवादास दोनों पत्नियों के साथ हंसी-खुशी रहने लगे किंतु दूसरी पत्नी मगदु बाई को भगाकर ले आने के कारण सामाजिक स्तर पर न्यावटा नहीं होने का मलाल उनको हमेशा सताता रहा ।
इस घटना के अडतालीस वर्षो बाद देवाराम व उनसे पचास वर्ष से ज्यादा उम्र के दोनों बेटों ने सामाजिक समझौता करने की पहल का प्रस्ताव भिजवाया जिसे मगदु बाई के पीहर पक्ष की ओर से स्वीकार कर लिया गया । पूर्व में तय मंगलवार की तिथि को देवाराम अपने सौलह परिवार सदस्यों सहित नाते-रिश्तेदारों के साथ दो जीपों में सवार होकर पारगियापाडा मगदु बाई के घर पहुंच गए जहां पीहर पक्ष की ओर से उनके दोनों सालों व परिजनों ने खुले दिल से स्वागत किया ।
--साथ लाई पगडी पहनाई, एक-दूसरे के चावल बनाकर खाए देवादास के पुत्र शिक्षक अर्जुन लाल ने बताया कि परिवार की आपसी सहमति के बाद पूरा परिवार व नाते रिश्तेदार मंगलवार को पारगियापाडा पहुंच गए । वहां पहुंचने के बाद सामाजिक रिति-रिवाज अनुसार पिता देवादास ने साथ लाइ्र पगडी अपने काउवा राम पारगी को पहनाई व उन्होंने पीहर की ओर से देवादास को पगडी पहनाई ।
इसके पश्चात गांव के सभी मंदिरों के लिए नारीयल भी झेलाए गए । पंरपरागत आदान-प्रदान होने के बाद देवादास ने अपने साथ लाए चालीस किलो चावल पीहर पक्ष को व पीहर पक्ष की ओर से दस किलो चावल देवादास के परिजनों को दिए गए । इन चावल को मौके पर ही पकाकर दोनों परिवारों ने साथ-बैठकर खाए जिसके बाद सामाजिक स्तर पर शादी को मान्यता दे दी गई ।
--पहली पत्नी बिमारी के कारण नहीं हो सकी शामिल देवादास की पहली पत्नी चम्पा बाई फलासिया अपने पुत्रों के साथ रहती हैं वहीं देवादास पैतृक गांव में किराणे की दुकान होने के कारण वहीं पर मगदु बाई के साथ रहते हैं । हालांकि समय-समय पर देवादास मगदु बाई के साथ अपने बेटों व पहली पत्नी के साथ फलासिया आवास पर रहने के लिए भी जाते हैं । मंगलवार को अदा हुई भांजणा रस्म की पैरवी पहली पत्नी चंपाबाई ने ही की थी किंतु उनका स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे मंगलवार को इस सामाजिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाई ।
--भांजणा की रस्म की हुई थी अदायगी राजस्थान आदिवासी संघ पदाधिकारी हीरा लाल डाबी से मिली जानकारी के अनुसार आदिवासी समुदाय में सामाजिक रिति-रिवाज से शादी होने पर पीहर पक्ष के समाज वालों द्वारा सवा रूपए ससुराल पक्ष से लिए जाते हैं जिसे दापा कहा जाता हैं । वहीं यदि कोई लडका-लडकी प्रेम संबंधों के चलते भाग कर शादी कर लेते हैं तो भी सामाजिक स्तर पर उनको शादी को मान्य करवाने के लिए पीहर पक्ष को पीहर में ही पहुंच भोज करवाना पडता हैं जिसे भांजणा की रस्म अदायगी कहा जाता हैं ।
परिवार की स्थिति :- पहली पत्नी से दो पुत्र हैं - कन्हैया लाल उम्र 54वर्ष पेशे से कम्पाउण्डर, अर्जुन लाल उम्र 52वर्ष पेश से शिक्षक, कन्हैया लाल के बच्चें - तेजमोहन, खुशलता, खुशवंती व दिलमोहन एवं अर्जुन लाल के सुनीता, सरोज, मंजुला, सुनील कुमार । कन्हैया लाल के बच्चों की शादी होने के साथ ही पौतों की भी शादियां हो गई हैं । दूसरी पत्नी मगदु बाई से एक पुत्री हुई थी किंतु चौदह वर्ष की उम्र में बिमार होने के बाद उसकी मौत हो गई थी । देवादास के परिवार में कुल सौलह सदस्य हैं ।
Updated on:
28 Mar 2018 11:47 am
Published on:
28 Mar 2018 07:30 am
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