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PATRIKA EXCLUSIVE: उदयपुर जिले के 711 स्कूलों में से महज 6 के हुए 80-जी पंजीयन, मार्च तक करना था शत प्रतिशत काम लेकिन फिर भी फिसड्डी ही रहे हाल

मेनार. सरकारी स्कूलों में निजी क्षेत्र की जनसहभागिता लागू करने के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति और विद्यालय विकास व प्रबंधन समिति के 80जी में पंजीयन नाम

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PATRIKA EXCLUSIVE: govt school 80G Registration in udaipur

PATRIKA EXCLUSIVE: उदयपुर जिले के 711 स्कूलों में से महज 6 के हुए 80-जी पंजीयन, मार्च तक करना था शत प्रतिशत काम लेकिन फिर भी फिसड्डी ही रहे हाल

उमेश मेनारिया / मेनार. सरकारी स्कूलों में निजी क्षेत्र की जनसहभागिता लागू करने के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति और विद्यालय विकास व प्रबंधन समिति के 80जी में पंजीयन नाम मात्र के हो पाए हैं। विभागीय आदेशों के एक साल बाद भी संस्थाप्रधान रुचि नहीं दिखा रहे। हालात यह है कि निदेशालय की ओर से रिमाइंडर जारी हुए, फिर भी अब तक केवल 6 स्कूलों के संस्थाप्रधानों ने 80जी में पंजीयन करवाया है।

जबकि मार्च 2018 तक सभी स्कूलों को 80जी में पंजीयन करवाना था। माध्यमिक शिक्षा बीकानेर निदेशक ने 16 अप्रेल को चौथा रिमाइंडर लेटर जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस कार्य को शत प्रतिशत पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इससे पूर्व जुलाई, सितम्बर और नवम्बर 2017 में निदेशालय ने आदेश जारी किए थे।

क्यों जरुरी है 80जी
योजना का उद्देश्य दानदाताओं को प्रेरित करना है। शिक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को लागू करना है। स्कूलों के संसाधनों में बढ़ोतरी, मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति के लिए भामाशाहों को प्रोत्साहित किया जाना है। सहयोग करने वाले व्यक्ति को 80जी में पंजीकृत स्कूल से रसीद दी जाती है, जिससे दानदाता को आयकर में छूट मिल सके। इससे पूर्व विकास शुल्क की रसीद दी जाती थी, मगर वो 80जी में मान्य नहीं थी।

जिले के स्कूल का आंकड़ा, जहां नहीं हो रहा काम

जिले में माध्यमिक व उच्च माध्यमिक के कुल 711 स्कूल है। इसमें से केवल 383 स्कूलों ने पेनकार्ड के लिए आवेदन किया है। जिनमें 286 विद्यालयों को पेनकार्ड जारी हो चुके हैं। केवल 59 विद्यालयों ने 80जी के लिए आवेदन किया है। जिसके तहत जिलेभर में मात्र 6 विद्यालयों को 80जी का प्रमाण पत्र जारी हुआ है। जिले के झाड़ोल, फलासिया, सेमारी से एक भी आवेदन नहीं हुआ है। कोटड़ा व कुराबड़ से एक-एक आवेदन हुआ है, वहीं पेन कार्ड बनाने में कोटड़ा सबसे नीचे पायदान पर है, यहां 44 विद्यालयों में से मात्र 2 के पेन कार्ड बने हैं। सर्वाधिक 80जी और पेन कार्ड आवेदन भीण्डर ब्लॉक से हैं, यहां के 72 स्कूलों में से 45 के पेन कार्ड जारी हो चुके हैं। 11 ने 80जी और 55 ने पेन कार्ड के लिए आवेदन कर दिया, जिनमें से मेनार कन्या माध्यमिक विद्यालय को 80जी प्रमाण पत्र जारी हो चुका है।

जिले के फिसड्डी ब्लॉक
फलासिया, गोगुन्दा, झाड़ोल-फलासिया, झल्लारा, खेरवाड़ा, कोटड़ा, कुराबड़, लसाडिय़ा, ऋषभदेव, सायरा, सलूम्बर, सेमारी से एक भी विद्यालय को 80जी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ।

छह स्कूल, जो है आगे
कन्या माध्यमिक विद्यालय मेनार, उच्च माध्यमिक विद्यालय चिरवा, उच्च माध्यमिक विद्यालय धानमंडी, उच्च माध्यमिक विद्यालय जेवाणा, उच्च माध्यमिक विद्यालय खारबर, उच्च माध्यमिक विद्यालय काया को 80जी के तहत आयकर छूट प्रमाण पत्र मिल चुके हैं।


प्रधानाध्यापिका ने की पहल

वल्लभनगर तहसील के मेनार स्थित राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में दानदाताओं को आयकर में छूट मिलेगी। स्कूल ने सिम्बर 2017 में आवेदन किया था। प्रधानाध्यापिका भूपेंद्र कोर अरोड़ा ने पहल करते हुए 5 हजार की सहायता राशि दी। इसके बाद अन्य शिक्षकों ने भी सहयोग किया। भामाशाह चुन्नीलाल मानावत ने 21000 रुपए राशि दी।

विद्यालय के बाहर दान देने और आयकर छूट के सम्बंध में जानकारी लिखवाई है। पहले हम शिक्षकों ने कुछ राशि से शुरुआत की। अब यहां दानदाताओं को भी आयकर में छूट की रसीद मिल सकेगी।
भूपेंद्र कोर अरोड़ा, प्र्रधानाध्यापिका, बालिका माध्यमिक विद्यालय

80जी पंजीयन की प्रकिया बहुत लंबी है। संस्था प्रधान मेहनत कर रहे है, परन्तु एसडीएमसी के नाम में संशोधन के बाद पेन कार्ड में संशोधन, पिछले तीन साल की ऑडिट रिपोर्ट, 80जी पंजीयन प्रक्रिया में परिवर्तन होने के कारण सम्पूर्ण प्रकिया आयकर कार्यालय जयपुर से विलम्ब हुई है। अधिकतर के पेन कार्ड जारी हो चुके हैं। 80जी आवेदन भी प्रकियाधीन है।
पंकज वया, शाला दर्पण प्रभारी अधिकारी, भीण्डर ब्लॉक

सरकारी स्कूल होने के बावजूद भी पूरी कागजी कार्रवाई और जांच पड़ताल के बाद 80जी में पंजीयन होता है। जांच पड़ताल के बाद पूरी कार्रवाई जयपुर से होती है। ऑफलाइन फिर ऑनलाइन और लंबी प्रकिया के कारण देरी हुई है। जल्द ही सभी विद्यालय का 80जी के तहत पंजीयन होगा। अभी तक 19 स्कूलों का पंजीयन हुआ है।
नरेश डांगी, जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक प्रथम

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