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PATRIKA IMPACT: पत्रिका की पड़ताल पर पुलिस की मुहर, मेल नर्स सहित चार जनों के विरुद्ध मामला दर्ज, राजस्थान पत्रिका ने किया था मामले का खुलासा

आखिरकार हाथीपोल थाना पुलिस ने तथाकथित डॉक्टर (मेल नर्स) सहित चार जनों को नामजद कर उनके विरुद्ध मामला दर्ज किया।

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patrika impact: bima fraud with tribals in udaipur

उदयपुर . आदिवासियों के नाम पर फर्जी बीमा करवा कर क्लेम राशि उठाने के मामले में राजस्थान पत्रिका के खुलासे के बाद आखिरकार हाथीपोल थाना पुलिस ने तथाकथित डॉक्टर (मेल नर्स) सहित चार जनों को नामजद कर उनके विरुद्ध मामला दर्ज किया। अब इस घोटाले की और परतें खुलने की उम्मीद है।


राजस्थान पत्रिका ने गत ३० मार्च के अंक में ‘जिनके खाने के लाले उनके नाम पर उठा लाखों का बीमा क्लेम’ शीर्षक से खबर प्रकाशन के बाद पुलिस के साथ पत्रिका ने भी पड़ताल की थी। प्रारंभिक जांच में गड़बड़झाले के खुलासे के बाद पुलिस ने चोकडिय़ा (नाई) निवासी पुष्पा पत्नी रामा गमेती की रिपोर्ट पर तथाकथित डॉक्टर डालसिंह, उसके दलाल रमेश चौधरी, बीमा एजेन्ट दिलीप मेघवाल व पूर्व उपसरपंच शंकरलाल के विरुद्ध मामला दर्ज किया। एसपी राजेन्द्र प्रसाद गोयल ने मामले की जांच उपाधीक्षक (पश्चिम) भंवरसिंह हाडा को सौंपी।

आरोपित मेल नर्स काफी शातिर है, जिसने गैंग बनाकर बीमार आदिवासियों का नयाखेड़ा में अपने निजी क्लिनिक पर उपचार के बहाने फर्जी बीमा किया। बीमारी से मौत होने के बाद पोस्टमार्टम में अलग-अलग कारण बताकर लाखों रुपए की क्लेम राशि उठाई। इस राशि में मृतक बीमित परिवार के आश्रितों को चंद राशि ही दी।

उपचार के बहाने करवाया बीमा
रिपोर्ट में परिवादिया पुष्पा ने बताया कि उसके पति रामलाल की सामान्य मौत हुई थी। काका ससुर शंकरलाल मृत्यु से पूर्व पति को नयाखेड़ा में डालसिंह के क्लिनिक पर ले गए, जहां इलाज के बहाने बीमा करवाते हुए बैंक में खाता खुलाया। बैंक व कंपनी के बारे में उसे कुछ भी नहीं पता। मेल नर्स ने पोस्टमार्टम के दौरान पति की मौत सर्पदंश से बताकर बीमा क्लेम उठाया, लेकिन परिवादिया नॉमिनी पुष्पा को कुछ नहीं दिया। हकीकत में रामलाल की मौत बीमारी से हुई थी। परिवदिया का कहना था कि जिस बैंक में खाता खुलवाया था, वहां की चेकबुक हस्ताक्षर करवाकर डालसिंह ने अपने पास रखते हुए बीमा राशि उठा ली।


कई और लोगों को भी उठाया बीमा

पुष्पा ने रिपोर्ट में बताया कि सभी आरोपित झूठा प्रलोभन देकर गंभीर बीमारों का बीमा करते हैं और उनकी मौत के बाद राशि हड़प लेते हैं। रिपोर्ट में कुछ और लोगों के नाम भी लिखे है जिनके फर्जी तरीके से बीमा राशि उठी। इनमें तुलसीराम चौधरी, हमेरसिंह, रूपा भील, गेहरी लाल, नानालाल, लक्ष्मण, मोहन, धर्मा, जीवा व वालिया गमेती शामिल हैं। सीआई रवीन्द्र चारण के नेतृत्व में टीम अभी पूरा खुलासा करने में लगी है।