
सुशील सिंह चौहान /उदयपुर . नवानिया स्थित पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय ने विश्वविद्यालय के कायदों को ताक में रखकर शोधार्थी को ही पीएचडी कर रही छात्रा का एडवाइजर बनाने का मामला सामने आया है। विवाद बढ़ता देख महाविद्यालय प्रशासन व्यवस्था को माइनर एडवाइजर बताकर गुमराह करने का प्रयास किया है।
महाविद्यालय के एनीमल न्यूट्रीशन विभाग के अधीन कविता शेंडे पीएचडी की विद्यार्थी है। महाविद्यालय प्रशासन ने 21 मार्च 2017 को एडवाइजरी कमेटी की सूची में 4 आचार्य के नाम जारी किए। इनमें से मेजर एडवाइजर डॉ. सीएस वैष्णव एवं शोधार्थी सहित 3 प्राध्यापकों को एडवाइजर बनाया गया। मामला सामने आया तो प्रशासनिक अमले ने सफाई में नया तर्क देते हुए अध्यापन कार्य से जुड़ी हुई शोधार्थी महिला आचार्य को माइनर एडवाइजर का नाम दिया, जबकि एडवाइजर आवंटन सूची में कहीं भी माइनर शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया। खास यह है कि महाविद्यालय की गलती को विश्वविद्यालय ने भी मुहर लगाकर अनुशंसा कर दी थी।
इसलिए भी गलत
17 दिसम्बर 2014 को बीकानेर विश्वविद्यालय के पोस्ट ग्रेज्युएट स्टडीज के तत्कालीन डीन डॉ. जीएस मनोहर ने विभागीय सूची जारी कर 5वें क्रम के सामने स्पष्ट किया कि संबंधित महिला आचार्य केवल टीचिंग और मास्टर डिग्री प्रोग्राम की गाइड रहेगी। ऐसे में पीएचडी एडवाइजर बनाने का मामला तूल पकड़ रहा है। इसी सूची में पीएचडी कराने वाले आचार्यों के भी नाम दिए गए हैं।
संभव है माइनर एडवाइजर
मेजर एडवाइजर का पीएचडी होना अनिवार्य है। अध्यापन कार्य से जुड़े आचार्य को माइनर एडवाइजर नियुक्त किया जा सकता है। यह जानते हुए कि वह पीएचडी की विद्यार्थी है।
डॉ. सी.एस. वैष्णव, डीन, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय
है बिल्कुल गलत
पीएचडी योग्यता नहीं रखने वाले आचार्य को पीएचडी विद्यार्थी का एडवाइजर किसी सूरत में नहीं बनाया जा सकता। अनजाने में अगर, गलत हुआ है तो उसमें संशोधन किया जाएगा।
डॉ. एस.के. कश्यप, डीन, पोस्ट ग्रेज्युएट स्टडीज, बीकानेर विवि
डीन ही अधिकृत
पोस्ट ग्रेज्युएट स्टडीज के डीन अगर, योग्यता विहिन एडवाइजर की नियुक्ति गलत बता रहे हैं तो वह गलत ही होगा। उनसे अच्छा कोई और नहीं बता सकता।
हेमंत दाधीच, रजिस्ट्रार, राजूवास बीकानेर
Updated on:
11 Apr 2018 12:56 pm
Published on:
11 Apr 2018 12:43 pm
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