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विवाहिता को आत्महत्या के प्रेरित करने वाले पति को 7 वर्ष की कैद

- परेशान होकर विवाहिता ने कुएं में कूद दे दी थी जान

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मो. इल‍ियास/उदयपुर. विवाहिता को प्रताडि़त कर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाले आरोपित को न्यायालय ने 7 वर्ष के कठोर कारावास व 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। हिरणमगरी थाने में गत 11 जून 2015 को डाकनकोटड़ा निवासी भंवरीबाई ने अम्बामाता घाटी तितरड़ी निवासी राजू पुत्र दल्लाजी मीणा के खिलाफ पुत्री मोहनी को प्रताडि़त कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। न्यायालय में आरोप पत्र पेश होने पर अपर लोक अभियोजक प्रेमसिंह पंवार ने 15 गवाह व 21 साक्ष्य पेश किए। आरोप सिद्ध होने पर अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश (महिला उत्पीडऩ प्रकरण) के पीठासीन अधिकारी डॉ. दुष्यंत दत्त ने आरोपित राजू को धारा 306 में 7 वर्ष के कठोर कारावास व 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

यह था मामला

भंवरीबाई ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि 14 साल पहले पुत्री मोहनी की राजू मीणा से शादी हुई थी। उसके एक लडक़ा व दो लड़कियां है। शादी के बाद राजू अपनी पत्नी मोहनी के साथ आए दिन मारपीट करता था। परेशान होने पर वह लगातार पीहर आती-जाती रही। समझाकर उसे कई बाद ससुराल भेजा गया। 1 जून 2015 को राजू ने मोहनी के साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया। 10 दिन बाद उसे समझाकर फूला के साथ उसे वापस ससुराल भेजा। अगले ही दिन लोगों ने मांगीलाल पटेल के कुएं के पास किसी महिला के चप्पल पड़े होने की सूचना दी। भंवरीबाई पुत्री के आत्महत्या की आशंका में तुरंत उसके ससुराल पहुंची। वहां बच्चों रात को पिता द्वारा मां के साथ मारपीट करने व रात को ही मां के घर से चले जाने की बात बताई। परिवादिया कुएं पर पहुंची तो उसे मोहनी के ही चप्पल मिले। ग्रामीणों की मदद से कुएं में शव की तलाशी की तो मोहनी का शव निकल आया।

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बच्चे मां के प्रेम वात्सल्य से वंचित हुए

अभियुक्त अपनी पत्नी के साथ आए दिन शराब पीकर मारपीट करते हुए शारीरिक व मानसिक यातनाएं देकर मारपीट कर प्रताडि़त कर कू्ररता कारित कर उसे आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित किया। जिसके परिणाम स्वरुप निर्दोष नारी ने अपने जीवन की इहलीला समाप्त कर ली। जिसके कारण उसके बच्चे अपनी मां के मातृत्व से वंचित रहे एवं मृतका अपने बच्चों के प्रेम एवं वात्सल्य से सदैव के लिए वंचित हो गई।

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