
हेमंत ऋतु में वैसे तो कई तरह के फूल खिलते हुए देखे हैं, लेकिन एमपीयूएटी में दिल्ली का पूसा गुलदस्ता, पूसा चित्रासा, पूना का डीएफआर सी-२, रेड स्टोन, लुधियाना का लेमन रेड ओर वेस्ट बंगाल का सबिता के फूल रोमांचित कर रहे हैं।

हेमंत ऋतु में वैसे तो कई तरह के फूल खिलते हुए देखे हैं, लेकिन एमपीयूएटी में दिल्ली का पूसा गुलदस्ता, पूसा चित्रासा, पूना का डीएफआर सी-२, रेड स्टोन, लुधियाना का लेमन रेड ओर वेस्ट बंगाल का सबिता के फूल रोमांचित कर रहे हैं।

लाल, पीले, केसरिया, सफेद फूलों की जुगलबंदी से मानों सतरंगी चादर बिछी हुई लगती है। इन फूलों का परीक्षण देश में ६ संस्थानों पर किया जा रहा है। राजस्थान में इनको उदयपुर और जयपुर के वातावरण में परखा जा रहा है। मेवाड़ की धरा ने यह पुष्प शृंगार स्वीकार कर लिया है।

लाल, पीले, केसरिया, सफेद फूलों की जुगलबंदी से मानों सतरंगी चादर बिछी हुई लगती है। इन फूलों का परीक्षण देश में ६ संस्थानों पर किया जा रहा है। राजस्थान में इनको उदयपुर और जयपुर के वातावरण में परखा जा रहा है। मेवाड़ की धरा ने यह पुष्प शृंगार स्वीकार कर लिया है।

फूलों की खेती कई लोग करते हैं। फूल मालाएं और गुलदस्ते बनाने में इनका प्रयोग खूब होता है। लोग घर, आंगन और गमलों में एेसे फूल सुंदरता के लिए लगाते हैं।

फूलों की खेती कई लोग करते हैं। फूल मालाएं और गुलदस्ते बनाने में इनका प्रयोग खूब होता है। लोग घर, आंगन और गमलों में एेसे फूल सुंदरता के लिए लगाते हैं।

इसी को लेकर पुष्प अनुसंधान निदेशालय पूना की ओर से परीक्षण के बाद फूलों की प्रजाति का प्रस्ताव केन्द्र को भेज दिए जाते हैं। इसके बाद नेशनल वैरायटी रिलिज कमेटी इन्हे देशभर में उगाने संबंधित अनुमति देती है।

इसी को लेकर पुष्प अनुसंधान निदेशालय पूना की ओर से परीक्षण के बाद फूलों की प्रजाति का प्रस्ताव केन्द्र को भेज दिए जाते हैं। इसके बाद नेशनल वैरायटी रिलिज कमेटी इन्हे देशभर में उगाने संबंधित अनुमति देती है।