
Reproduction of plants after planting
गींगला. खेती-किसानी में भी जोखिम कम नहीं, बस जरूरत चुनौती लेने की है। इसे साबित किया है सलूम्बर ब्लॉक में गुड़ेल के किसान उम्मेदसिंह राजपूत ने। दो साल पहले उम्मेदसिंह ने बंजर जमीन को चुनौती के रूप में चुना। दिन-रात एक कर इसे समतल कर अनार के पौधे रोपे। दो साल बाद मेहनत रंग लाई है। पौधे अब फलने लगे हैं।
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तालाब के पास अरसे से बंजर और अनुपजाऊ पड़ी कालिया मगरा की जमीन पर उम्मेद ने दो साल पहले अनार के पौधे लगाए थे। प्रेरणा के सवाल पर उन्होंने बताया कि मुंबई में व्यवसाय करता हूं। पड़ोसी व्यापारी बालोतरा-बाड़मेर के रहने वाले हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र में फलदार खेती-बाड़ी और उन्नत पशुपालन पर किसी समय चर्चा की थी। बालोतरा जाकर देखा तो खेती को लेकर सोच ही बदल गई, क्योंकि वहां किसानों के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं।
विचार आया कि क्यों ने अपनी बंजर जमीन पर ऐसा कोई प्रयोग किया जाए। कालिया मगरा की जमीन ऊबड़-खाबड़ थी। इसे सपाट करने के लिए जेसीबी लगानी पड़ी। तीन भागों में बांटकर मिट्टी के पाले बनाए। पानी का बंदोबस्त रण लडऩे से कम नहीं था, क्योंकि आसपास को स्रोत नहीं था। ट्यूबवेल खुदवाई, लेकिन पानी नहीं मिला। वापस प्रयास किया तो आस पूरी हो गई। भरपूर पानी देख अनार के 1200 पौधे रोपे।
इन्हें सींचने के लिए ड्रिप सिस्टम लगाने के साथ सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनवाई और निगरानी के लिए चौकीदार लगा दिया। खरीद समेत हर पौधे पर 50 रुपए खर्च हुए। ये पौधे अब फलने लगे हैं और उम्मेदसिंह को उम्मीद है कि अच्छी उपज हुई तो सालाना 10 लाख रुपए तक मिल जाएंगे।
मलाल : अनुदान मिला, न विभाग से जानकारी
उम्मेदसिंह ने बताया कि उद्यानिकी विभाग की ओर से प्रगतिशील किसान को पौधो की खरीद पर अनुदान का प्रावधान है। पत्नी जम्मूकुंवर के नाम अनुदान के लिए फाइल तैयार भी की थी, लेकिन नतीजा नहीं मिला। यह स्थिति भी तब बनी, जब सरकार बड़ी पहल पर किसानों को प्रोत्साहन के साथ विशेषज्ञ सलाह भी दिलवाती है। पौधों की सुरक्षा और दूसरी जानकारियों के लिए उन्हें अपने स्तर पर विशेषज्ञों की सलाह लेनी पड़ी।
तत्कालीन कृषि पर्यवेक्षक भीमराज पटेल ने बताया कि किसान ने पौधे दूसरी जगह से खरीदे थे। उद्यानिकी विभाग के नियमों के विपरीत होने के कारण अनुदान नहीं मिल पाया। हालांकि प्रयास पूरे किए थे। उम्मेदसिंह को ड्रिप पर अनुदान दिलवाया। मौजूदा कृषि पर्यवेक्षक हरीश पटेल का कहना है कि वह कई बार उम्मेदसिंह के बगीचे पर गए, जहां अपेक्षित सुझाव दिए।
Published on:
04 Dec 2017 09:22 am
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