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अगर नहीं बचाया तो उदयपुर का 400 वर्ष पुराना यह तालाब खो देगा अपना अस्तित्व

शहर से सटे डबोक का तालाब pond भी अपनी बर्बादी पर आंसू बहा रहा है। इसको भरने वाले प्राकृतिक जल मार्ग भूमि दलालों व हाइवे निर्माण करने वाली कंपनी ने तहस-नहस कर दिए हैं। ऐसे में तालाब में कैचमेंट से पानी की आवक नगण्य हो गई है। करीब 15 फीट की भराव क्षमता वाले इस तालाब में गत 6-7 वर्ष में एक बूंद भी पानी नहीं आया है। तालाब में जगह-जगह पेटा काश्त खातेदारों ने चार दीवारियां बना दी है, वहीं पेटे में 8-10 नलकूप खोदकर खेती कर रहे हैं जिन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। तालाब में लम्बी-चौड़ी पत्थरों की दीवारें खड़ी कर दी गई है। तालाब के अंतिम छोर पर कई मकान तक खड़े कर दिए गए हैं लेकिन इसकी जिम्मेदार अनदेखी कर रहे हैं।

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बर्बादी का आंसू रो रहा उदयपुर का यह तालाब, पेटे में बन गए मकान

उदयपुर . शहर से सटे डबोक का तालाब भी अपनी बर्बादी पर आंसू बहा रहा है। इसको भरने वाले प्राकृतिक जल मार्ग भूमि दलालों व हाइवे निर्माण करने वाली कंपनी ने तहस-नहस कर दिए हैं। ऐसे में तालाब में कैचमेंट से पानी की आवक नगण्य हो गई है। करीब 15 फीट की भराव क्षमता वाले इस तालाब में गत 6-7 वर्ष में एक बूंद भी पानी नहीं आया है। तालाब में जगह-जगह पेटा काश्त खातेदारों ने चार दीवारियां बना दी है, वहीं पेटे में 8-10 नलकूप खोदकर खेती कर रहे हैं जिन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। तालाब में लम्बी-चौड़ी पत्थरों की दीवारें खड़ी कर दी गई है। तालाब के अंतिम छोर पर कई मकान तक खड़े कर दिए गए हैं लेकिन इसकी जिम्मेदार अनदेखी कर रहे हैं।

गुड़ली की पहाडिय़ां हैं केचमेंट एरिया
गुड़ली की पहाडिय़ों से बहकर आने वाला पानी डबोक तालाब का भरता है। मधुफला के पास छह-सात नाले आकर बड़े नाले में समाहित होते है लेकिन हाइवे निर्माण के दौरान छोटे नाले तो रोड की भेंट चढ़ गए, वहीं बड़ा मुख्य नाला भी संकरा कर दिया गया है। रोड की दूसरी तरह निजी कॉलेज व अन्य संस्थान बन गए जिससे पानी आगे नहीं जा पा रहा है। एकमात्र जल मार्ग अवरुद्ध हो गया है। पेटाकाश्त खातेदारी जमीन की लोगों ने जगह-जगह दीवारें बनाकर प्लाट काट दिए। दूसरी ओर, उदयसागर से नाहरमगरा की
तरफ पक्की नहर बन गई है जिससे पानी की आवक व प्रवाह मार्ग रुक गया है।

पाल में रिसाव
करीब पांच सौ बीघा में फैले इस तालाब की दीवार काफी जीर्ण-शीर्ण हो गई है। बारिश के दौरान थोड़ा-बहुत बरसाती पानी आता है जो रिसाव से खाली हो जाता है। तालाब के ओवरफ्लो को भी भूमि दलालों ने दो से ढाई फीट कम कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब पूरा भरने पर किनारे स्थित मकानों के आसपास पांच-पांच फीट पानी भर जाता है। इस तालाब का जीर्णोद्धार मावली के पूर्व विधायक निरंजननाथ आचार्य के समय हुआ था।

तालाब पर एक नजर

400 वर्ष पुराना है डबोक तालाब
15 फीट है तालाब
की भराव क्षमता
10 से अधिक अवरोध प्राकृतिक बहाव मार्ग में
6 साल में एक बूंद भी
नहीं आया पानी

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