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निजी से सरकारी स्कूलों में कितने बच्चे आए, बताओ… सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को देनी होगी रिपोर्ट

जिला स्तरीय प्रवेशोत्सव की प्रगति रिपोर्ट में सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारियों से यह जानकारी मांगी है।

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भुवनेश पंड्याा/ उदयपुर . अब सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता का आकलन इससे भी होगा कि उस स्कूल में समीपस्थ निजी स्कूल से कितने बच्चे पढऩे को आए। इस बार जिला स्तरीय प्रवेशोत्सव की प्रगति रिपोर्ट में सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारियों से यह जानकारी मांगी है। इस बार सरकार दो प्रकार के प्रपत्र तैयार कर रही है जिनमें पहली तो जिला स्तरीय रिपोर्ट और दूसरी राज्य स्तरीय रिपोर्ट शामिल है।

राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद की ओर से भेजे गए प्रपत्र में ब्लॉक वार विद्यालयों की संख्या, सात से 14 वर्ष के ऐसे बच्चे जो स्कूल से बाहर हैं, नव प्रवेशित बच्चे, निजी स्कूल से आए हुए बच्चे, स्कूलों की संख्या जहां 95 प्रतिशत छात्रों को क्रमोन्नत किया है, स्कूलों की संख्या जिनमें सर्वे किया गया, स्कूल से बाहर के बच्चों की संख्या जिन्हें चिह्नित किया है, कितनी प्रभात फेरिया निकाली गई, कितनी रैलियां निकाली गई, एसडीएमसी व एसएमसी की बैठकों का विवरण, किस अधिकारी ने कहां-कहां कब-कब निरीक्षण किया...आदि बिन्दुओं को लेकर जानकारी मांगी गई है।

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वहां पैसे देने होता है यहां सब नि:शुल्क
जिले में प्रवेशोत्सव में बच्चों को अधिक से अधिक प्रवेश दिलाने के लिए यह तैयारी कर रहे हैं कि अभिभावकों को यह बताया जाए कि निजी स्कूलों में पैसे देने होते हैं, लेकिन सरकारी में सब नि:शुल्क रहता है। साथ ही अभिभावकों को वीडियो के जरिए यह बताएंगे कि सरकारी में पढ़े हुए बच्चे कैसे दूसरों के सामने स्वयं को बेहतर साबित करते हैं।

प्रवेशोत्सव की पूरी तैयारी कर कार्य शुरू करने के निर्देश के लिए बैठक रखी हैं, जो भी सूचना प्रपत्रों के माध्यम से मांगी जा रही है, उसे जुटा कर उपलब्ध करवाएंगे। खास तौर पर पहली से पांचवीं के बच्चों के प्रवेश पर हमारा फोकस है, इसका कारण ये है कि वो बच्चे लम्बे समय तक स्कूल में पढ़ेंगे।
गिरिजा वैष्णव, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक उदयपुर