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उदयपुर की कई कॉलोनियां समस्याओं की गिरफ्त में, अब चुनावी वर्ष में बंधी है अच्छे दिनों की आस

उदयपुर.महीनों और सालों से रहवासी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं।

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राजदीप शर्मा 'राकेश'/ उदयपुर . यंू तो समूचे शहर की अनेक कॉलोनियां एेसी समस्याओं की गिरफ्त में हैं,जहां महीनों और सालों से रहवासी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। निकाय के चुनावों से लेकर विधानसभा तक के चुनावों में किसी न किसी पार्टी के लोक लुभावने वादों में गुम होकर अच्छे दिनों की आस में समय काटते रहते हैं। कुछ एेसा ही आलम गुरुवार को पुरोहितों की मादड़ी स्थित सूर्य नगर कॉलोनी में पड़तालके दौरान देखने को आया।

सेवानिवृत अध्यापक मनोहरसिंह बताते हैं कि वे पिछले २० वर्षों से यूआईटी की इस कॉलोनी में निवास कर रहे हैं। कुछ समस्याएं तो पहले दिन से आज तक बरकरार हैं। लेकिन, उन दिनों बस्ती इतनी सघन नहीं होने से जैसे-तैसे काम चल जाता था। आज इस कॉलोनी में साढ़े तीन सौ मकान में हजार से ज्यादा लोग सड़कों किनारे पसरी गंदगी और टूटी नालियों से खासे परेशान हैं। इधर, गृहिणी पार्वती गोस्वामी बताती हैं एक दिन छोड़कर एक दिन आने वाले पीने का पानी कम दबाव और कम समयावधि से आने के कारण घर-परिवार में सबसे अधिक दिक्कत होती है।

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एेसे में कुछ लोगों ने मजबूरन दो कनेक्शन ले रखे हैं या बूस्टर पर निर्भर होना पड़ता है। सबसे ज्यादा समस्या गर्मियों में होती है जब आए दिन मंहगे भाव पानी के टेंकर खरीदकर काम चलाना पड़ता है। एक निजी कंपनी में जॉब कर रही मधु मारू कहती हैं कि अक्सर सुबह मुंह अंधेरे ड्यूटी पर जाने की मजबूरी में बड़ी समस्या कॉलोनी की मुख्य सड़क किनारे खड़े एफसीआई के बड़े वाहन और उनके चालकों की फब्तियों से होती है। अन्य लोग भी बताते हैं कि कई मर्तबा तो ये वाहन कॉलोनी के अंदर तक खड़े होकर सिरदर्दी पैदा कर देते हैं।

खुद का व्यवसाय कर रही अनुराधा शर्मा बताती हैं कि बरसों से उजड़े पार्क की टूटी चारदीवारी और रेलिंग के अलावा आवारा कुत्ते-सुअर आदि समस्या के साथ साल २०१४ में महिलाओं के लिए बना स्नानागार रखरखाव को तरस रहा है। कुछ कॉलोनी वासियों ने मनवाखेड़ा-न्यू विद्यानगर के बीच बहती आयड़ किनारे बने श्मशान के लिए जाने वाली सड़क की दुर्दशा और कहीं-कहीं रोड़ लाइट्स की कमी को भी रेखांकित किया।

इनका कहना है..

ज्यादातर समस्याएं मेरी संज्ञान में हैं और हमने प्रस्ताव भी नगर निगम को दे रखे हैं। पानी और सफाई के लिए मार्च के अंतिम सप्ताह तक टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी। उम्मीद है इसके बाद इन समस्याओं का समाधान होना शुरू हो जाएगा। - प्रमिला चौधरी, पार्षद