
वृक्षारोपण के लिए तैयार की गई फेसिंग
उदयपुर. देश-दुनिया में प्री-वेडिंग शूट, पर्यटकों और सोशल मीडिया रील्स के जरिए अपनी पहचान बना चुकी रायता हिल्स अब और हरी-भरी नजर आएगी। ग्राम पंचायत कालीवास के राजस्व ग्राम रायता की करीब 60 बीघा चारागाह भूमि पर 25 से 30 हजार फलदार, औषधीय और स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधे लगाने की तैयारी शुरू हो गई। पौधरोपण से पहले पहाड़ियों और पेड़ों की सुरक्षा के लिए पत्थर के पिलरों से फेसिंग की जा रही है, जिसका75 प्रतिशत काम हो चुका है। यह पूरी पहल राष्ट्रीय पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण मंच, ग्राम पंचायत कालीवास और प्रशासन के सहयोग से की जा रही है। खास यह है कि जिस जमीन पर पौधरोपण होगा, उसका स्वामित्व और उपज ग्राम पंचायत कालीवास का ही रहेगा।
रील्स और प्री-वेडिंग शूट से दुनिया तक पहुंची रायता की खूबसूरती
उदयपुर शहर से करीब 20 किमी दूर स्थित रायता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से पर्यटकों की पसंद बना है। बारिश के दिनों में यहां की पहाड़ियां हरे रंग की चादर ओढ़ लेती हैं। बादल पहाड़ियों को अपनी आगोश में ले लेते हैं और आसपास के क्षेत्र में प्राकृतिक झरने बहने लगते हैं। प्रकृति के बीच आदिवासी परिवारों के पारंपरिक झोपड़े, पहाड़ी रास्ते और हरियाली रायता को अलग पहचान देते हैं। एडवेंचर करने वालों के लिए भी यह क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बन चुका है। मानसून के दौरान पर्यटक रायता की प्राकृतिक खूबसूरती देखकर पहाड़ी राज्यों के पर्यटन स्थलों को भी भूल जाते हैं। प्री-वेडिंग शूट और सोशल मीडिया रील्स ने रायता हिल्स की तस्वीरें देश-दुनिया तक पहुंचाई हैं। अब प्रस्तावित पौधरोपण के बाद यह पूरा क्षेत्र और अधिक हरित और आकर्षक नजर आएगा।
पहले सुरक्षा, फिर पौधरोपण
पौधरोपण से पहले क्षेत्र की सुरक्षा पर जोर दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत कालीवास की ओर से पहाड़ियों और पेड़ों के संरक्षण के लिए पत्थर के पिलर लगाकर फेसिंग की जा रही है। 75 प्रतिशत फेसिंग पूरी हो चुकी है। इसके बाद पौधरोपण के लिए खड्डे तैयार किए जा रहे हैं। योजना के तहत ऐसे पौधे लगाए जाएंगे, जो रायता की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल हों। फलदार और औषधीय पौधों के साथ स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
जमीन पंचायत की, फल और उपज पर भी पंचायत का अधिकार
ग्राम पंचायत की ओर से जारी अनुमति में स्पष्ट किया है कि पौधरोपण के लिए चिह्नित भूमि का स्वामित्व ग्राम पंचायत कालीवास का ही रहेगा। जमीन का किसी भी प्रकार से स्वामित्व हस्तांतरण नहीं होगा। पौधों से मिलने वाले फल, पत्ते और अन्य उपज पर भी ग्राम पंचायत का अधिकार रहेगा। संस्था को केवल पौधरोपण, बीज रोपण, सिंचाई, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन कार्य की अनुमति दी गई है। प्रशासन और ग्राम पंचायत की अनुमति में स्पष्ट शर्त रखी गई है कि चिह्नित भूमि पर पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों के अलावा किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं की जा सकेगी। शर्तों का उल्लंघन होने पर अनुमति निरस्त की जा सकती है।
रायता क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति को देखते हुए यहां पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि पर नियमानुसार सशर्त अनुमति दी है। योजना में स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधे लगाए जाएंगे। भूमि का स्वामित्व ग्राम पंचायत का ही रहेगा और किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन को पूरी योजना की जानकारी है।
अजीत कुमार मीणा, बीडीओ, पंचायत समिति गिर्वा
रायता जैसी खूबसूरत प्राकृतिक जगह को कंक्रीट से नहीं, बल्कि हरियाली से विकसित करने की जरूरत है। हमारा उद्देश्य चारागाह भूमि का संरक्षण करना और यहां अधिक से अधिक पेड़ लगाना है। इस क्षेत्र की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल फलदार, औषधीय और स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे है। हमारा प्रयास है कि यहां प्रकृति और पर्यावरण के बीच लोग आनंद ले सकें, लेकिन किसी भी तरह का अनावश्यक व्यावसायिक निर्माण नहीं हो।
डॉ. लक्ष्मीनारायण आमेटा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण मंच
Updated on:
19 Jul 2026 06:06 pm
Published on:
19 Jul 2026 06:06 pm
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