
युवराज सिंह राणावत
उदयपुर. सपनों की उड़ान के लिए न बड़े शहर की जरूरत होती है और न ही महंगे संसाधनों की। जरूरत है तो बस जिद, जुनून और लगातार मेहनत की। मावली तहसील के छोटे से गांव सुआवतों का गुड़ा के 18 वर्षीय युवराज सिंह राणावत ने इसी सोच को सफलता से साबित कर दिया। किसान परिवार से निकला युवराज आज सोशल मीडिया पर फिटनेस की दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा है। वह यूट्यूब चैनल पर छह लाख से अधिक और इंस्टाग्राम पर दो लाख से ज्यादा लोगों को जोड़ चुका है।
युवराज ने महज 15 वर्ष की उम्र में फिटनेस की दुनिया में कदम रखा। सोशल मीडिया पर फिटनेस इन्फ्लुएंसर विक्रम सिंह से प्रेरित होकर युवराज ने घर पर ही अभ्यास शुरू किया। छह माह तक लगातार मेहनत के बावजूद उम्मीद जितने परिणाम नहीं मिले तो भरोसा डगमगाने लगा। कई बार लगा कि शायद यह रास्ता उसके लिए नहीं है, लेकिन उसने हार मानने के बजाय खुद को फिर संभाला। युवराज की जिंदगी का निर्णायक मोड़ तब आया, जब उन्हें अपने आदर्श विक्रम सिंह से मिलने और उनकी देसी जिम में प्रशिक्षण लेने का अवसर मिला। सही तकनीक, अनुशासित दिनचर्या और टीमवर्क ने उनकी मेहनत को नई दिशा दी। महज एक महीने में फिटनेस में ऐसा बदलाव आया कि सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। सफलता ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले ही महीने में यूट्यूब चैनल पर 50 हजार सब्सक्राइबर और इंस्टाग्राम पर 10 हजार फॉलोअर्स जुड़े। इसी दौरान सोशल मीडिया से पहली आय भी शुरू हुई। दूसरे महीने में यूट्यूब का सिल्वर प्ले बटन हासिल कर लिया। आज लाखों युवा उसके फिटनेस वीडियो देखकर प्रेरणा ले रहे हैं। कमाई से युवराज ने अपनी पसंद की कार भी खरीदी, इसे वह मेहनत का पहला पुरस्कार मानता है।
पापा बोले- कुछ भी कर-बड़ा आदमी बनना है...
युवराज ने 12वीं तक ही पढ़ाई के दौरान ही बड़ी सफलता हासिल कर ली। उनके जुनून को देखकर किराना व्यवसायी पिता तेजसिंह राणावत तो कहते थे कि कुछ भी करो, लेकिन बड़ा आदमी बनना है तुझे। लेकिन मां चिंतित थी कि कहीं बेटा पढ़ाई में पिछड़ न जाए। इसलिए मां टोकती रहती थी।
सफलता का मंत्र... अनुशासित प्रयास और धैर्य
युवराज का मानना है कि प्रेरणा किसी से भी मिल सकती है, लेकिन सफलता केवल अनुशासन, निरंतर अभ्यास और धैर्य से मिलती है। वह युवाओं से कहता है कि शुरुआती असफलता से घबराएं नहीं, बल्कि उसे सीख मानकर आगे बढ़ें। लगातार प्रयास ही मंजिल तक पहुंचाता है।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं
गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत अवसर और आत्मविश्वास की है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर अभ्यास, सही मार्गदर्शन और धैर्य ही हर मंजिल तक पहुंचाते हैं। शुरुआती असफलता अंत नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार तो छोटे गांव से निकलकर भी पूरी दुनिया में पहचान बनाई जा सकती है।
Updated on:
18 Jul 2026 07:08 pm
Published on:
18 Jul 2026 07:08 pm
