
प्रकाश कुमावत / उदयपुर . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों ने भी भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए लाए गए काले कानून के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। आपात काल में सीआरपीसी के तहत जेलों में बंद रहे स्वयंसेवकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि वे इस काले कानून को तत्काल वापस लिया जाए। ऐसा नहीं किया तो वे आपातकाल जैसा आंदोलन शुरू कर देंगे। इधर, आरएसएस के आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने भी आंदोलन को समर्थन दे दिया है। इससे पूर्व जयपुर में मेट्रो के नाम पर रोजगारेश्वर महादेव तथा अन्य मंदिर तोडऩे के विरोध में भी संघ ने मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजाया था। उसी तरह से इस मामले में स्वयंसेवकों ने आपातकाल बंदी लोकतंत्र प्रहरी मंच के बैनर तले आंदोलन करने का निर्णय किया गया है। मंच की शनिवार को जयपुर में हुई प्रदेश संयोजकों की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन करने का यह निर्णय किया गया। बाद में आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप देते हुए प्रदेशभर में इसकी तैयारी शुरू कर दी है। बैठक में मंच के जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, सिरोही, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर, कोटा , बूंदी आदि के संयोजक मौजूद थे।
अमर कर दिया भ्रष्ट अधिकारियों को - चौधरी
आरएसएस के आनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्रीबद्रीनारायण चौधरी ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा शोषण किसानों का हुआ है जिसमें अधिकारियों की भूमिका अहम रही है। इस कानून को लाकर सरकार ने भ्रष्ट अधिकारियों को अमर कर दिया है क्योंकि अब कोई शिकायत करने लायक नहीं बचा है। इससे किसानों में आक्रोश है और वे यह कानून किसी भी सूरत में लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने मंच की बैठक में शामिल होकर किसानों से इस कानून का विरोध करने का आह्वान किया है।
कानून वापस नहीं तो भरेंगे जेल
आपातकाल बंदी लोकतंत्र प्रहरी मंच के प्रदेश संयोजक खेमराज कृष्ण गोयल ने सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि काला कानून वापस नहीं हुआ तो जिस तरह आपातकाल के दौरान जेलें भरी गई थी, ठीक उसी तरह लोकतंत्र बचाने के लिए इस बार भी हम स्वयंसेवक जेल भरने से पीछे नहीं हटेंगे। मंच के संयोजकों ने सभी जिलों में आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
Published on:
06 Nov 2017 05:45 pm
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