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मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. जंगलों का हिसाब-किताब ऑनलाइन हो गया है। अब वन भवन से लेकर जंगल में तैनात क्षेत्रीय अधिकारी ऑनलाइन ही जानकारी आला अफसरों को भेजेंगे। एक क्लिक से उदयपुर से लेकर जयपुर के अफसर सारा कामकाज देखेंगे। ऑनलाइन सिस्टम से सबसे बड़ा फायदा वन अपराध की जानकारी पर निगरानी रहेगी और जिन प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराने ही और उसमें देरी होती है तो भी पकड़ में आएगी। राज्य सरकार ने फोरेस्ट मैनेजममेंट एंड डिसीजन सॅपोटिंग सिस्टम (एफएमडीएसएस) सिस्टम तैयार किया है। इसके तहत जयपुर के वन भवन से लेकर जिला मुख्यालय और रेंज के अधिकारियों को इससे जोड़ा है। इस सिस्टम पर हर जानकारी को अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसके तहत अभी बहुत कुछ जोड़ दिया गया तो कई अन्य बिन्दु भी जैसे-जैसे सामने आ रहे है उनको जोड़ते हुए सिस्टम को अपडेट किया जाएगा।
सब कुछ अपडेट होगा
- वन अपराध
- शिकार के मामले
- वन भूमि पर अतिक्रमण
- अमलदरामद की स्थिति
- पौधरोपण की स्थिति
- वन उत्पाद की जानकारी
...पर फाइल तो चलेगी
सिस्टम के ऑनलाइन होने के बाद भी फाइल तो चलेगी। सरकार का जोर है कि जो भी आंकड़े और जानकारी है वह ऑनलाइन अपडेट करने से तत्काल जानकारी उपलब्ध होगी। नीचे से लेकर ऊपर तक के अफसर एक क्लिक पर अपडेट ले सकेंगे। वैसे कार्यालयों में सरकारी कागज व फाइलों में तो दस्तावेज रखने ही होंगे। आंकडे इस पोटर्ल पर अपलोड करने होंगे।
संभाग के अफसरों को समझाया सिस्टम
इधर, यहां कालकामाता नर्सरी में उदयपुर संभाग के अफसरों को इस तकनीकी आधार पर ऑनलाईन पोर्टल को लेकर समझाया गया। फील्ड स्टाफ से लेकर अफसरों को विषय विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक बी.प्रवीण ने सभी से आधुनिक तकनीक एवं जीपीएस तकनीक पर आधारित सूचनाओं को नियमित रूप से दर्ज कर प्रभावी समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। सहायक वन संरक्षक डी.के.तिवारी, विशेषज्ञ सुहैल मजबूर, दलपत सिंह राजपुरोहित, उमेश बंसल ने पोटर्ल को लेकर प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक, (वन्यजीव) आर.के.सिंह, वन संरक्षक, उदयपुर आर.के.खैरवा, कार्य आयोजना अधिकारी, आर.के.जैन, उप वन संरक्षक, उदयपुर (उत्तर) सुपोंग शशी, उप वन संरक्षक, उदयपुर अजय चित्तौड़ा आदि उपस्थित थे।
Published on:
02 Mar 2020 10:52 am
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