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मधुलिका सिंह/उदयपुर. शिक्षा विभाग ने जनवरी-फरवरी माह में बच्चों को स्कूल ड्रेस का कपड़ा तो दे दिया, लेकिन प्रदेश के करीब 8 लाख बच्चाें के जनाधार कार्ड खातों से लिंक नहीं होने से ड्रेस सिलाने के लिए मिलने वाली राशि उनके खातों तक नहीं पहुंच पाई। इसके कारण छात्रों को ड्रेस सिलवाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सभी बच्चों के जनाधार कार्ड को खातों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के लिए भी अधिकारियों की ओर से निर्देश जारी किए हैं। शिक्षकों पर ये काम अतिरिक्त आन पड़ा है और परीक्षा के समय में वे इस काम को अंजाम नहीं दे पा रहे।
उदयपुर जिले के 57 हजार से अधिक बच्चे
दरअसल, प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पहली से आठवीं तक में अध्ययनरत विद्यार्थियों को राज्य सरकार की ओर से दो यूनिफॉर्म नि:शुल्क दी जा रही है। ड्रेस का कपड़ा बच्चों को मिल गया है तो सिलाई की राशि 200 रुपए संबंधित विद्यार्थियों के खाते में जमा होनी है। इन्हें शिक्षा विभाग ने यूनिफॉर्म का कपड़ा तो वितरित कर दिया, लेकिन सिलाई के लिए सरकार से 200 रुपए की राशि नहीं मिल पाएगी। गौरतलब है कि सिलाई की राशि उन्हीं बच्चों को दी जाएगी, जिनके जनाधार का ऑथेंटिकेशन हो चुका है और जनाधार से जुड़े खातों में सीधे राशि आएगी। उदयपुर जिले में 3903 स्कूलों में कुल 4 लाख 3828 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। करीब 4 लाख 2 हजार 484 विद्यार्थियों को ड्रेस के कपड़े वितरित किए जा चुके हैं। लेकिन इनमें केवल 3 लाख 46 हजार 505 विद्यार्थियों का जनाधार प्रमाणीकृत हो चुके हैं। इसमें अब भी 57 हजार 323 बच्चे ऐसे हैं, जिनके जनाधार बैंक खातों से नहीं जुड़ पाए हैं।
प्रदेश में ये है स्थिति -
कुल स्कूल - 66445
कुल विद्यार्थी - 6481794
कुल जनाधार प्रमाणीकृत - 5687788
इतने बच्चे हैं वंचित - 794006
जनाधार प्रमाणीकरण प्रतिशत - 87.75 %
कुल विद्यार्थी जिन्हें ड्रेस का कपड़ा मिल चुका - 6471941
ड्रेस प्राप्त करने वालों का प्रतिशत - 99.85 %
उदयपुर जिले की ये है स्थिति -
कुल स्कूल - 3903
कुल विद्यार्थी - 403828
कुल जनाधार प्रमाणीकृत - 346505
इतने बच्चे हैं वंचित - 57323
जनाधार प्रमाणीकरण प्रतिशत - 85.81 %
कुल विद्यार्थी जिन्हें ड्रेस का कपड़ा मिल चुका - 402524
ड्रेस प्राप्त करने वालों का प्रतिशत - 99.68 %
ये आ रही परेशानियां -
- मिनिमम अकाउंट बैलेंस के अभाव में जनाधार से जुड़े बैंक खाते बंद होना।
- निरंतर लेनदेन ना होने से बैंक खातों का डेड होना।
- बाहरी राज्यों के छात्र जो राजस्थान में रह रहे हैं उनके जनाधार नहीं बनना।
- अभिभावकों की उदासीनता।
- ग्रामीण क्षेत्रों में बालकों के माता-पिता का अलग-अलग रहना (सामाजिक स्तर पर तलाक, नाता प्रथा आदि)।
इनका कहना ....
तमाम प्रयासों के बाद भी शाला दर्पण पोर्टल पर जनाधार प्रमाणीकरण के अभाव से लाखों विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म सिलाई की राशि नहीं मिल पाई है। ऐसे बालकों के अभिभावकों को राशि संबंधित विद्यालयों के बैंक खाते में भेज कर वितरित करवाई जाए तो शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल की जा सकती है। भविष्य में इन बालकों के लिए सरकार की ओर से विशेष शिविर लगाकर आधार-जनाधार प्रमाणीकरण की नि:शुल्क व्यवस्था हो तो सभी के लिए उचित रहेगा।
शेर सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ
Updated on:
17 Mar 2023 03:22 pm
Published on:
17 Mar 2023 03:14 pm
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