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रामनवमी विशेष : पूरी दुनिया में राम का नाम, केवल भारत में ही नहीं विदेशों में पूजे जाते हैं भगवान श्रीराम

सिय राम मय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरी जुग पानी.... संत तुलसीदास कहते हैं कि पूरे संसार में भगवान श्रीराम का निवास है, सबमें भगवान हैं और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम कर लेना चाहिए।

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मधुलिका सिंह/उदयपुर. मर्यादा पुरुषोत्तम राम इस दुनिया में हर जगह हैं। इसके प्रमाण भी मंदिरों, गुफाओं, पत्थरों आदि हर जगह मिल जाएंगे। उनके अनुयायी और भक्त भी वर्षों से उनकी भक्ति में रमे हैं। रामनवमी के अवसर पर हम आपको बता रहे हैं कि देश में ही नहीं विदेशों में भी श्रीराम पूजे जाते हैं।इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू के अनुसार, मेवाड़ में रामोपसाना के केंद्र के रूप में अयोध्या के बाबा हनुमान दास ने नरसिंद्वारा स्थापित किए। महाराणा भीमसिंह के शासनकाल में राज्याश्रय में उदयपुर, आमेट, चित्तौड़, आकोला आदि गांवाें में नृसिंह द्वारा बने। वहां वैष्णवों द्वारा लीला के साथ रामलीला आयोजित की जाती रही। मेवाड़ में 1828 ई. से स्थानीय भाषा में रामलीला की जाती है। मेवाड़ में चित्रित आर्ष रामायण दुनिया भर के कला चिंतकों के लिए आश्चर्य की वस्तुत है। यह लंदन, मुंबई और उदयपुर में संग्रहित है। वहीं, अनेकों देशों में राम पूजे जाते हैं, उनके प्रतिमा प्रमाण मिले हैं।

बाली रामायण संस्कृति की कला भूमि

इसके बारे में सभी भारतीय एकमत से सहमत होते हैं कि वहां रामायण व रामलीला बहुत होती है। हम सोच भी नहीं सकते कि बाली में रामायण संस्कृति कितने गहरे तक पैठ बना चुकी है। वहां के प्राचीन खुले मंच की दीवारों पर रामायण अंकन से संबंधित है। रामायण के सभी महत्वपूर्ण प्रसंगों को सुंदर कारीगरी से प्रस्तुत किया गया है। भारत में शायद ही ऐसा कोई प्रेक्षागृह हो।

सूरीनाम में तुलसीदास की प्रतिमा

सूूरीनाम में जहां सबसे प्राचीन रामलीला प्रारम्भ हुई थी वहां संत तुलसीदास की अद्भुत प्रतिमा लगाई गई है। तुलसी जयंती पर अनेक कार्यक्रम किए जाते हैं। सूरीनाम को ‘श्रीराम’ का डच अपभ्रंश भी मानते हैं। बाबा तुलसी की ऐसी प्रतिमा अनोखी है। तुलसी बाबा कैरेबियंस के दिल में बसते हैं।

इंडोनेशिया में पत्तों से बने बॉक्स पर रामायण

रामायण का सेतुबंध भले ही भारत में काल्पनिक माना जाता रहा हो परंतु बाली के मुख्य चौराहे पर सेतुबंध का अंकन, बैंकाॅक के सुवर्ण भूमि एयरपोर्ट की भांति ही भव्य बना हुआ है। बाली की चित्रकला व उपयोगी कलाओं में भी रामायण का महत्वपूर्ण स्थान है। दर्शनीय स्थलों के साथ रामायण सभी कलारूपों मे प्रकट होकर रोज़गार के साधन के रूप में भी है। यहां पत्तों से बने बॉक्स पर रामायण का अंकन है।

इराक में मिले पत्थर पर तराशे राम

अयोध्या शोध संस्थान के अनुरोध पर इराक में भारत के राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित इर्बिल के कांस्युलेट चंद्रमौलि कर्ण, द्वितीय सचिव धर्मेन्द्र सिंह के साथ इराक के गवर्नर, सुलेमानिया विश्वविद्यालय के पुरातत्व वेत्ताओं के साथ स्वयं बेलुला पहाड़ी पर गए। अत्यंत दुर्गम पहाड़ी पर 2000 ई पूर्व में पत्थर पर तराशे गए राम व हनुमानजी के चित्र देखे। इन चित्रों ने मध्यपूर्व में भारतीय संस्कृति को पुष्ट किया।

रूस के थियेटर में रामलीला

इरशोव थियेटर मास्को का अत्यंत प्राचीन थियेटर है। यहां पद्मश्री गेन्नादी पिचनिकोव बच्चों को रामलीला पढ़ाते थे। गेन्नादी 44 वर्षों तक रूस की रामलीला में राम बनते थे। भारत सरकार ने पद्मश्री से 2008 में सम्मानित भी किया था। रूस के अलावा कंबोडिया, थाईलैंड, ट्रिनिडाड आदि में भी भगवान राम किसी न किसी रूप में पूजे जाते हैं। वहीं, श्रीलंका में तो कई प्रमाण मौजूद हैं।

नेपाल ने जारी किया राम पर डाक टिकट

नेपाल में भगवान श्रीराम पर डाक टिकट जारी किया जा चुका है। ये डाक टिकट प्रभु श्रीराम और माता सीता को दर्शाता है। ये संवत 2024 में जारी किया गया था। लेकसिटी के संग्रहकर्ता और मेवाड़ फिलेटली क्लब के सचिव महेन्द्र शर्मा के कलेक्शन में ये डाक टिकट है। माता सीता का मायका नेपाल के जनकपुर में बताया जाता है । हाल ही में दो पत्थर की शिलाएं भी नेपाल से प्रभु श्रीराम मंदिर के लिए अयोध्या आई हैं।