
Rishi panchami 2017: Rishi panchami rashsya pouranik katha
उमेश मेनारिया/ मेनार. भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि शुक्रवार को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी । इस दिन महिलाएं सप्त ऋषियों की पूजा करती हैं। महिलाएं उपवास रखेंगी और सुबह मोरधन या दूब के ऋषि बनाकर पूजा की जाएगी। इस दिन महिलाएं मोरधन (सामा) के व्यंजन से ही व्रत खोलती हैं। भाद्रपद के महीने में गणेश चतुर्थी के दुसरे दिन ऋषि पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है । ये दिन भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिन मनाया जाता है। ये दिन बहुत महत्त्व रखता है क्योंकि इस दिन सप्त ऋषयो कश्यप, अत्री, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम , जमदग्नि और वशिष्ठ की पूजा होती है ।
ऐसी मान्यता है कि इनकी पूजा से रजस्वला दोष से मुक्ति मिलती है । हिन्दू धर्म में ऋषि पंचमी का महत्व बहुत अधिक माना जाता हैं। सभी दोषों से मुक्ति पाने के लिए इस व्रत का रखा जाता हैं। ऋषि पंचमी कोई एक त्यौहार नहीं बल्कि एक व्रत हैं जिसमें सप्त ऋषि की पूजा की जाती हैं। इस व्रत में हल की मदद से पैदा हुए अनाज को नहीं खाया जाता। इस व्रत में सिर्फ मोरधन के चावल या समा के चावल ही खाया जाता है। सप्तऋषियों की पूजा होगी हल्दी से चौकोर मंडल और गाय के गोबर से चैका बनाकर फिर लकड़ी के पाटे पर सफेद कपड़ा बिछाकर पान के ऊपर सप्त ऋषि बनाकर उनकी स्थापना की जाएगी । इसके बाद हल्दी, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, जनेऊ, अक्षत, सफ़ेद वस्त्र, फल, मिठाई, नारियल आदि से सप्त ऋषियों का पूजन करते हुए उनसे क्षमा याचना मांगी जाएगी । पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा पढ़कर आरती करके नैवेद्य आदि का भोग लगाने के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांट दिया जाएगा ।
सिर्फ मोरधन के व्यंजन से ही खुलेगा व्रतधारी महिलाओं का व्रत
घरों में महिलाएं सुबह मोरधन या दूब पर सफेद कपड़ा लपेट कर 7 ऋषि बनाएंगी। इसके बाद मोरधन, पंचामृत, दूध, दही, फलों आदि से पूजा की जाएगी। महिलाएं कहानी सुनने के बाद बड़ों से आशीर्वाद लेंगी। मोरधन की खिचड़ी खीर बनाई जाएगी। इसी से महिलाएं व्रत खोलेंगी। संस्कृत संस्था के पंडित अम्बा लाल शर्मा ने बताया कि ऋषि पंचमी शुक्रवार को मनाई जाएगी और इसका शुभ मुहूर्त 11:09 से 01:35 तक 2 घंटे 26 मिनट का रहेगा ।
Published on:
14 Sept 2018 08:00 am
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