
रोडवेज बसों को 'फर्स्ट एड' की दरकार, कहीं बॉक्स नदारद तो कहीं दवाओं का इंतजार
उदयपुर. रोडवेज की गाडि़यों में फर्स्ट एड को भी फर्स्ट एड की दरकार है। अधिकतर गाडि़यों में फर्स्ट एड लगे हुए हैं। कुछ में टूटे फूटे तो कुछ में सही सलामत होने के बावजूद इनमें दवाइयां नहीं है। ऐसे में यात्रा के दौरान किसी प्रकार की घटना होती है तो प्रारंभिक स्तर पर उपचार की सुविधा भी नहीं मिल पाएगी।
उदयपुर डिपो में आने वाली रोडवेज की किसी भी डिपो की गाड़ी में उपचार न तो दवाइ मिली न ही पट्टियां, कुछ गाडि़यां तो ऐसी थी जिनमें फर्स्ट एड बॉक्स ही नहीं मिले। कुछ गाडि़यों में लगे फर्स्ट एड बॉक्स तो बंधे हुए मिले। इनमें उदयपुर, जोधपुर, राजसमंद, अजमेर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा आदि किसी भी डिपो में फर्स्ट एड की सुविधा नहीं मिली। चालकों और परिचालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि फर्स्ट एड बॉक्स अधिकतर बसों में लगे हुए हैं, लेकिन इनमें से एक भी गाड़ी में प्रारंभिक उपचार की कोई सुविधा नहीं है।
बस स्टैंड पर दोपहर में चलने वाली जोधपुर डिपो की उदयपुर-जोधपुर चलने वाली बस में प्लास्टिक का फर्स्ट एड बॉक्स लगा हुआ है। टूटे-फूटे इस बॉक्स को इसी के इलास्टिक से बांध दिया गया है। इसी प्रकार उदयपुर डिपो की सागवाड़ा-चिखली रूट पर चलने वाली बस में फर्स्ट एड नहीं है। डूंगरपुर डिपो की बस में चालक के केबिन में फर्स्ट एड बॉक्स लगा हुआ है। लेकिन यह खाली पड़ा है। राजसमंद डिपो की आरजे30पीए1912 संख्या की बस में बॉक्स का शीशा टूटा हुआ है।
सुझाव पेटिका भी खा रही धूल
कई गाडि़यों में सुझाव पेटिका लगी हुई है। जो धूल खा रही है। इन पेटियों में एक भी सुझाव नहीं डाला जाता। वही अधिकतर बसों की सीटें तड़की हुई है।
Published on:
26 Oct 2023 09:38 pm
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
