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भारत की हर पीढ़ी पढ़े महाराणा प्रताप के जीवन की कहानी और प्रेरणा लें: होसबाले

प्रताप गौरव केंद्र में महाराणा प्रताप जयंती समारोह का उद्घाटन, लघु फिल्म का भी लोकार्पण
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले

उदयपुर. महाराणा प्रताप जयंती की पूर्व संध्या पर प्रताप गौरव केन्द्र की ओर से आयोजित नौ दिवसीय महाराणा प्रताप जयंंती समारोह का ऑनलाइन उद्घाटन शनिवार शाम 5 बजे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने किया। निदेशक अनुराग सक्सेना ने प्रताप गौरव केन्द्र पर बनी लघु फिल्म का लोकार्पण भी होसबाले द्वारा किया गया। तत्पश्चात रवि बोहरा एवं भगवत सिंह द्वारा मायड़ थारो वो पूत कठे काव्य गीत प्रस्तुत किया।

समारोह को ऑनलाइन सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि उदयपुर का प्रताप गौरव केंद्र राष्ट्रीय धर्म, संस्कृति एवं इतिहास बोध का तीर्थ है। महाराणा प्रताप के उच्चारण या उनका स्मरण से ही अपने अन्दर देश भक्ति का दीपक जाग्रत होता है। अकबर की सेना और प्रताप की सेना दोनों की तुलना करना संभव नहीं है। युद्ध कौशल में राणा के समान तो शत्रु के लोग नहीं थे।

हल्दीघाटी जैसे युद्ध को भारत के युद्धों की शृंखला के इतिहास में कुछ ही लड़ाई को स्थान प्राप्त हुआ है। हल्दीघाटी युद्ध के राणा प्रताप की लड़ाई का अध्यापन ठीक से पूर्ण होना चाहिए। राणा प्रताप कभी मुगलों से हारे नहीं। इधर उधर की पुस्तकों में इतिहास के गलत संकेत मिल जाते हैं। सत्य को प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। भारत की हर पीढ़ी को राणा प्रताप के जीवन की कहानी के आधार पर पढऩे का अवसर मिलना चाहिए ताकि वे उनसे प्रेरणा लें।

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति नौजवानों को इस प्रकार के अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रयत्न करेगा। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप संस्कृति के जीवन मूल्यों का आदर्श थे। जैसे प्रभु श्रीराम ने रामराज्य की बात की थी उसी प्रकार राजा के रूप में महाराणा प्रताप ने भी आदर्श स्थापित किया।