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29 घंटे की मशक्कत के बाद जयसमंद झील में युवक का शव निकाला

उदयपुर से गई एसडीआरएफ की टीम आधी अधूरी तैयारी के साथ मौके पर पंहुची

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एसडीआरएफ की टीम ने दूसरे दिन भी किया रेस्क्यु

जयसमंद. जयसमंद झील में सोमवार सुबह डूबने वाले युवक का शव मंगलवार को 29 घंटे की मशक्कत के बाद निकाला जा सका । गौरतलब है कि सोमवार को दिनभर स्थानीय गोताखोरों व एसडीआरएफ टीम के सदस्यों ने रेस्क्यू किया था। उदयपुर से गई एसडीआरएफ की टीम आधी अधूरी तैयारी के साथ मौके पर गई थी। ऑक्सीजन खत्म हो जाने से टीम के सदस्य वापस उदयपुर पहुंचे तथा रिफिलिंग करवाकर जयसमंद पहुंचे तब तक अंंधेरा हो जाने से रेस्कयू रोक दिया गया था।

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मंगलवार सुबह आठ बजे एसडीआरएफ टीम के इंचार्ज हेड कांस्टेबल तुलसाराम के निर्देश पर ड्राइवर राजवीर सिंह गैस किट व अन्य आवश्यक सामग्री पहन झील में उतरे व करीब तीन घंटे तक युवक की तलाश की लेकिन अधिक गहराई होने व पास ही पम्प चलने के कारण सफलता नहीं मिल पाई। सराड़ा थानाधिकारी रतनसिंह चौहान, जयसमंद जल संसाधन प्रबंधन समिति अध्यक्ष वालचंद सुथार ने रेस्क्यु टीम व स्थानीय नौका चालकों के साथ रेस्क्यु शुरू किया। करीब एक बजे युवक की पेंट में बल्ली फंसने से शव बाहर आ गया। युवक की जेब से मिले पर्स व आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस के आधार पर उसकी शिनाख्त भण्डारिया थाना कुशलगढ़ (बांसवाड़ा) निवासी लोकेन्द्र (25) पुत्र महेन्द्रसिंह के रूप में हुई। सराड़ा थानाधिकारी रतनसिंह ने बताया कि शिनाख्त होने के बाद सम्बन्धित थाने में सूचना दी गई। जिस पर उसके परिजनों को हादसे की जानकारी दी गई। लोकेन्द्र के परिवार में मां व इसका एक और भाई है। पिता की मौत हो चुकी है। प्रारंभिक जानकारी मिली है कि लोकेन्द्र व उसका भाई नशे के आदी थे। परिवारजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज नहीं करवाई थी। उनके आने के बाद ही आत्महत्या के कारणों का पता चल पाएगा। पुलिस पोस्टमार्टम के लिए शव झाड़ोल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले गई । इस दौरान वन्य जीव अभयारण्य के क्षेत्रीय वन अधिकारी महेन्द्रसिंह चुण्डावत, भाजपा देहात जिला उपाध्यक्ष शान्तिलाल मीणा व गातोड़ सरपंच हमीरलाल मीणा ने भी टीम का रेस्क्यु के दौरान सहयोग किया। इससे पहले युवक के स्थानीय होने की आशंका के चलते दो दिन तक आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।