
उदयपुर. करोड़ों खर्च करके भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट व नगर निगम के अधिकारी पिछोला झील में गिर रहे सीवरेज के पानी को नहीं रोक पाए हैं। अभी भी कई जगह झील में सीवरेज का पानी गिर रहा है। कई जगह हजारों लीटर साफ पानी नालियों में व्यर्थ बह रहा है। नई लाइन डालने व पम्पिंग स्टेशन बनाने में अभी भी कई तरह की अड़चनें आने से काम गति नहीं पकड़ पा रहा। इधर, प्रदूषित झील को साफ करने पर प्रतिमाह लाखों रुपए व्यर्थ बह रहे हैं। साढ़े चार किलोमीटर की परिधि में फैली झील का सबसे गहरा जख्म इसके पैंदे में बिछी सीवर लाइन है, जो जगह-जगह से लीकेज है। यह पानी को अशुद्ध कर रही है। इसके अलावा झील के चारों ओर कई प्वाइंट हैं, जहां से सीवरेज व मैला पानी सीधा झील में गिर रहा है। जिम्मेदार यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में नई सीवर लाइन बिछने के बाद समस्या खत्म हो जाएगी।
झील पर इतना खर्च
वर्ष - खर्च राशि - मेंटनेंस दर
2020 - 48 लाख - 12 लाख
2021 - 52.80 लाख - 13.20 लाख
2022 - 58.08 लाख - 14.52 लाख
2023 - 63.88 लाख - 15.97 लाख
2024 - 70.27 लाख - 17.56 लाख
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प्रदूषण रोकने का प्रयास कर रहे हैं
सीवरेज का पानी जहां गिर रहा है, उसे रोका गया है। झील के अंदर डली हुई लाइन को बाहर निकालने के लिए 11.50 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। सात पम्पिंग स्टेशन बनाने थे, दो का काम बाकी है, एक पर कोर्ट का स्टे होने से काम रुका पड़ा है।
मुकेश पुजारी, अधिशासी अभियंता, नगर निगम उदयपुर
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यहां गिर रहा झील में सीवर का पानी
अम्बामाता सामुदायिक भवन के पास, ब्रह्मपोल व भट्टवाड़ी में कुम्हारिया तालाब में लगातार सीवर का पानी गिर रहा है।
पुराना नाव घाट में सीवर ओवरफ्लो होकर गंदगी झील में जा रही है। यहां अमृत योजना में पंप हाउस बनाया गया है।
पंचदेवरिया व हनुमान घाट में वर्षाजल संग्रहण के लिए पाइप रखे हैं, उनमें पानी पिछोला गिर रहा है।
अम्बामाता पंप हाउस के बाहर पंप लगाकर पानी का खाली कर रहे।
Published on:
13 Sept 2023 02:40 pm
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