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#shardiyanavratra उदयपुर ने दी मां को विदाई, श्रद्धा से किया गरबा और प्रतिमाओं का विसर्जन

शोभायात्राओं में उमड़ी भीड़

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उदयपुर . शारदीय नवरात्र को लेकर शहर में विभिन्न स्थानों पर चल रही नौ दिवसीय गरबों की धूम शनिवार को थमी। कई स्थानों पर माताजी की प्रतिमाएं स्थापित की गई थी। इनका विधि-विधान से पूजन कर शुभ मुहूर्त में प्रतीकात्मक विसर्जन किया गया। इधर कई मंडलों ने गरबा और प्रतिमाओं का विसर्जन माताजी के मंदिरों में किया। शहर में कई स्थानों पर नवरात्र गरबा के आयोजन चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश स्थानों पर शनिवार को विसर्जन किया गया। विसर्जन से पूर्व गरबा पांडालों से माताजी की प्रतिमाए, गरबा कलश, जवारा आदि की पूजा-अर्चना कर शोभायात्रा के रूप में ढोल-नगाड़ों के साथ ले जाया गया। शोभायात्राओं में श्रद्धालु नाचते-झूमते हुए चल रहे थे।

एेसे हुआ विसर्जन

कई श्रद्धालु प्रतिमाओं को पहले झीलों के घाट पर ले गए। वहां पूजा-अर्चना करने के साथ ही प्रतिमाओं पर झीलों के पानी का छीड़काव किया गया। इसके बाद कुछ श्रद्धालुओं ने प्रतिमाएं घाट पर ही एक किनारे रख दी। कुछ श्रद्धालु नगर निगम की ओर से बनाए गए कुंड पर ले गए और उनमें प्रतिमाओं का विसर्जन किया।


एेसे हुआ पारंपरिक विसर्जन
जिन गरबा मंडलों ने गरबा कलश स्थापित किए थे। वहां गरबा पांडालों में विधि-विधान से गरबा खेला गया। इसके साथ ही शोभायात्रा के रूप में गरबा कलश को माताजी के मंदिरों में ले जाया गया। वहां पुन: गरबा का आयोजन हुआ। इसके बाद गरबा कलश को वहीं विसर्जित कर श्रद्धालु लौट आए।

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उमड़ा श्रद्धा का ज्वार
सुथारवाड़ा मित्र मंडल के की प्रतिमा शोभायात्रा के रूप में दोपहर करीब तीन बजे गणगौर घाट के लिए रवाना हुई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। खालसा ग्रुप के सदस्य करतब दिखाते हुए चल रहे थे। इसके साथ ही उज्जैन के विशेष ढोल की था पर श्रद्धालु झूमते रहे। इसके साथ ही गणपति, शिवजी और अन्य देवी-देवताओं की झांकियां भी शोभायात्रा में शामिल हुई। गणगौर घाट पर प्रतिमा का प्रतिकात्मक विसर्जन किया गया।


मां दुर्गा से की सुख-समृद्धि की कामना
भूपालपुरा स्थित बंग भवन में शनिवार सुबह दशमी की अपराजिता की विशेष पूजा की गई। पूजा में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं को सुख-सम़ृद्धि की कामना के साथ अपराजिता बांधी गई। शाम को सात बजे समाज के लोग पुन: बंग भवन पर एकत्रित हुए। वहां पूजा-अर्चना करने के साथ ही सुहागिनों ने माताजी की प्रतिमा पर सिंदूर अर्पित किया गया। इसके बाद महिलाओं एक-दूसरे की मांग भरी और सुहाग की लंबी उम्र की कामना की। इसके बाद शोभायात्रा के रूप में माताजी की प्रतिमा को स्वरूप सागर ले जाया गया। वहां प्रतीकात्मक रूप से प्रतिमा का विसर्जन किया गया। समाज के पूजा सचिव तपन रॉय ने बताया कि इसके बाद सभी समाजजन समाज भवन में एकत्रित हुए। समाज के पुरोहित ने श्रद्धालुओं पर शांतिजल का छिड़काव किया। इसके बाद प्रसादी हुई।