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विकृत सामाजिक व्यवस्था पर प्रहार करता है यह नाटक ‘किस्सा मौजपुर का’

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विकृत सामाजिक व्यवस्था पर प्रहार करता है नाटक 'किस्सा मौजपुर का'

राकेश शर्मा राजदीप/उदयपुर. नाट्यांश सोसाइटी ऑफ ड्रामेटिक एंड परफोर्मिंग आट्र्स और भारतीय लोककला मंडल के संयुक्त तत्वाधान में देवीलाल सामर को समर्पित छठे राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव की तीसरी शाम रविवार को टीम नाट्यांश के कलाकारों ने जयवर्धन द्वारा लिखित नाटक 'किस्सा मौजपुर का का असरदार मंचन किया।

दुल्हों को विदा कर ले जाने लगी दुल्हनें

इस नाटक के मूल कथानक में एक डॉक्टर खुद के फायदे के लिए गांव में क्लिनिक खोलता है। जिसमें परीक्षण कर कन्या भ्रूण हत्या की जाती है। जैसे ही ये बात फैलती है पूरा गांव लड़के की चाह में क्लिनिक की ओर दौड़ पड़ता है। एेसे में एक समय ऐसा आता है, जब गांव लड़कों से भर जाता है पर लड़की एक भी नहीं होती है। ऐसे हालात में कोई भी इस गांव में अपनी बेटियो की शादी करवाने को राजी नहीं होता। बाद में उन्हें बेटों की शादी में दहेज देने के साथ उन्हें विदा भी करना पड़ा।

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नाटक के विभिन्न किरदारों को अगस्त्य हार्दिक नागदा, राघव गुर्जरगौड़, नेहा पुरोहित, महेश जोशी, मोहम्मद रिजवान, धर्मेन्द्र टिलावत, सत्यजीत सिंह, राहुल सोलंकी, मोहन शिवतारे, चक्षु सिंह रूपवत, वल्लभ शर्मा, परख जैन, दीपक जोशी, करण, अक्षय गुर्जर, अंकित मौर्य, रूबी कुमारी, ईशा जैन, आकांक्षा द्विवेदी व कुमुद द्विवेदी ने पूरे मनोयोग से निभाया।

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