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‘हाथों के भी गर पांव होते, दुआएं दौड़कर जाती और कुबूल हो आती’

Suno na Preet ke geet : सुनो ना प्रीत के गीत... मुशायरे ने बांधा समां . कश्ती फाउंडेशन एवं टीम एन एफर्ट की ओर से एक होटल में 'सुनो ना प्रीत के गीत...' एकल प्रस्तुति का आयोजन हुआ। गीतकार एवं शायर कपिल पालीवाल ने कविताओं-शायरियों से समा बांधा। पालीवाल ने नई विधा सनातनी में प्रेम से अध्यात्म तक के सफर को शायरियों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

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कश्ती फाउंडेशन एवं टीम एन एफर्ट की ओर से एक होटल में 'सुनो ना प्रीत के गीत...' एकल प्रस्तुति का आयोजन।

उदयपुर. कश्ती फाउंडेशन एवं टीम एन एफर्ट की ओर से एक होटल में 'सुनो ना प्रीत के गीत...' एकल प्रस्तुति का आयोजन हुआ। गीतकार एवं शायर कपिल पालीवाल ने कविताओं-शायरियों से समा बांधा। पालीवाल ने नई विधा सनातनी में प्रेम से अध्यात्म तक के सफर को शायरियों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

इसके अलावा विभिन्न समसामयिक विषयों पर भी अपनी गजलें प्रस्तुत की। प्रमुख रूप से आज फिर एक सड़क एक खेत खा गई..., दंगे नहीं देखते मजहब..., मां तो बस मां होती है..., कोई गरीब बीमार न हो दुआ मेरी ये कहती है..., थाम रखा है उसने अपना हाथ मेरे हाथ में..., मुश्किलों रहना अब अपनी औकात में..., जब से सुना है तुम भोले हो, राख हो जाता हूं मैं... पेश की। संचालन दामिनी ने किया। डॉ. चित्रसेन ने मेवाड़ के भित्ति चित्रों पर नवीन प्रयोग करते हुए चित्र प्रदर्शित किए। शिल्पकार हेमंत जोशी ने स्टोन स्कल्पचर प्रस्तुत किए। चित्रकार नीलोफर मुनीर ने भी कलाकृतियों प्रस्तुत की। कश्ती फाउंडेशन की श्रद्धा मुर्डिया, प्रो. डॉ. विजयलक्ष्मी चौहान, आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा व संयुक्त निदेशक डॉ. कमलेश शर्मा ने विचार रखे। गीतकार डॉ. जयप्रकाश पण्ड्या, रिटायर्ड सीसीएफ राहुल भटनागर, महेन्द्रसिंह लालस, डॉ. अनिंदिता, नितीज मुर्डिया, नित्या सिंघल आदि मौजूद थे।