
उदयपुर . सहायक प्रोफेसर्स (मेडिसिन) की नियुक्ति में उपेक्षा के बाद प्रदेश सरकार ने जनजाति उपयोजना क्षेत्र के संभाग मुख्यालय उदयपुर में संचालित रवींद्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में पीजी (स्नातकोत्तर) कक्षाओं की सीटें बढ़ाने में अनदेखी की है।
इधर, प्रदेश के कोटा संभाग में जहां पीजी विद्यार्थियों की सुविधा के लिए 17 तक सीट बढ़ाने के फैसले के विरोध में उदयपुर मेडिकल कॉलेज को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा है। यह सीट भी नेत्र विभाग को आवंटित की गई है, जबकि मेडिसिन, सर्जरी, बाल चिकित्सा एवं गायनिक में बहुतायत में पीजी विद्यार्थियों की सीटों की आवश्यकता बनी हुई है। उच्च चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव आनंद कुमार के आदेश के अनुसार प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेज में कुल 97 सीटें बढ़ाई गई हैं। इसी तरह देश के अन्य राज्यों को जोड़ते हुए इन सीटों की संख्या 1 हजार से अधिक रखी गई है।
मामले के खुलासे के बाद स्थानीय प्रोफेसर्स के बीच इस बात को लेकर विरोध गहरा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर सरकार को समय पर सूचना भेजने में देरी की गई। दूसरी ओर, प्रशासनिक स्तर पर दो बार व्यक्तिगत तौर पर जानकारी भिजवाए जाने की बात स्वीकार की गई है। उच्च शिक्षा विभाग का पिछला रिकॉर्ड तलाशें तो सठ्ठंबंधित महाविद्यालयों से उनके यहां मौजूद फैकल्टी की संख्या और यूनिट की जानकारी मांगी गई थी।
केंद्र सरकार का ध्यान इस तरह था कि एमसीआई की बिना विजिट के ही राजकीय महाविद्यालयों में पीजी की सीटें दो गुना तक कर दी जाएं। सवाल यह उठ रहा है कि अगर, फैकल्टी देखकर ही सीटें बढ़ाई जानी थी तो पीडियाट्रिक सहित कुछ अन्य विभागों में सीटें फूल हैं। ऐसे में पीजी की सीटें क्यों नहीं बढ़ाई गई।
व्यक्तिगत भेजी सूचना
प्रदेश सरकार की ओर से मांगी गई जानकारी से जुड़ी फाइलें दो बार व्यक्तिगत भिजवाई गई है। आवंटन फैकल्टी को देखकर हुआ है। कोटा में फैकल्टी जरूरत से ज्यादा है। उनको इसका ही फायदा मिला है।
डॉ. डी.पी.सिंह, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज
कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष के वीआरएस पर हाइकोर्ट की मुहर
उदयपुर. आरएनटी मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कपिल भार्गव की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस)पर हाइकोर्ट ने मुहर लगा दी है। अदालती आदेश के तहत विभागाध्यक्ष डॉ. भार्गव को आगामी 31 मार्च तक सेवानिवृत्त करना है। इधर, अदालती आदेश के बारे में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. डीपी सिंह ने सरकार को जानकारी भेजी है, जिस बारे में फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है। गौरतलब है कि करीब 3 माह पहले प्रो. भार्गव ने प्राचार्य के माध्यम से उनका वीआरएस भिजवाया था।
इस पर सरकार स्तर पर चिकित्सकों की कमी बताते हुए उनका रिटायरमेंट नामंजूर किया गया। इस पर प्रो. भार्गव ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की, जहां से बीते दिनों यह आदेश जारी हुए। इससे पहले भी आरएनटी मेडिकल कॉलेज से कई चिकित्सक अदालत के माध्यम से उनकी सेवाएं समाप्त करा चुके हैं।
Published on:
28 Mar 2018 12:35 pm
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