
विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों से दिया विरासत संरक्षण का संदेश
उदयपुर. इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज और मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से सुविवि गेस्ट हाउस में विरासत में युवाओं की भूमिका और रोजगार के अवसर विषय पर चल रही दो दिवसीय कार्यशाला का समापन बुधवार को हुआ। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने विरासत संरक्षण पर प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों, विषय विशेषज्ञों और अतिथियों का ध्यान आकृष्ट किया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों में शहर के विरासत से जुड़े विभिन्न स्थलों की जानकारी देते हुए उनकी दयनीय स्थिति भी बतलाई। विद्यार्थियों ने चित्रों के माध्यम से पिछोला में पसरी गंदगी, सीसारमा नदी का नाले जैसा रूप ले लेना, देखभाल के अभाव में बावडिय़ों व कुंड़ों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की। इसके अलावा उदयपुर शहर के सीनियर टाउन प्लानर एसके श्रीमाली ने उदयपुर शहर की भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया।
आठ ग्रुप ने दी संदेशात्मक प्रस्तुतियां
संयोजक प्रो. बीपी भटनागर ने बताया कि प्रस्तुतियों के लिए छह विषयों पर आधारित आठ ग्रुप बनाए गए थे। इनमें प्रथम ग्रुप ने शहर की बावडिय़ों के बारे में जानकारी देते हुए उनके रखरखाव की बात कही। दूसरे ग्रुप ने तुलसी के महत्व को बताया, तीसरे ग्रुप ने धार्मिक वास्तुकला के तहत अम्बामाता मंदिर के बारे में बताया। चौथे ग्रुप ने सरस्वती पुस्तकालय की जानकारी दी। पांचवें ग्रुप ने कठपुतली नृत्य के महत्व, इतिहास व संरक्षण पर जोर दिया। छठे ग्रुप ने राजस्थान में संगीत कला पर मनमोहक प्रस्तुतियां दी व सातवें ग्रुप ने शानदार नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। सभी ग्रुप्स ने चार्ट के माध्यम से भी प्रेजेंटेशन दिया।
कभी टाइगर लैंड हुआ करता था उदयपुर
रिटायर्ड सहायक वन संरक्षक डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने कहा कि 1960-70 के दशक में उदयपुर टाइगर लैंड हुआ करता था, लेकिन अब नहीं रहा। एक शताब्दी पहले सज्जनगढ़ में भालू रहा करते थे, लेकिन वह भी अब नहीं रहे। उदयपुर कई मायनों में समृद्ध था, लेकिन संरक्षण के अभाव के चलते बहुत सी चीजें कम हो गई। उन्होंने विरासत संरक्षण की आवश्यकता जताई। विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एसएस सारंगदेवोत ने विरासत संरक्षण के लिए जागरूकता की बात कही। प्रो. एमएल कालरा ने पौराणिक मूल्यों से विद्यार्थियों को अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया। इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो प्रतिभा पांडे ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन इतिहास विभाग के डॉ पीयूष भादवीया और इंटेक दिल्ली से आई शिवा रावत ने किया। प्रो. ललित पांडे ने आभार जताया। इस अवसर पर प्रतिभागियों को विरासत संरक्षण से जुड़ी पुस्तके भी वितरित की गई।
Published on:
20 Sept 2018 02:23 am
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