
उदयपुर. राजस्थान लोक संगीत और गायकी में कई कलाकार हैं लेकिन हमारा फोक का फ्यूजन हमें दूसरों से अलग करता है। इसी ने हमें दुनियाभर में पहचान दिलाई है। ये संगीत हमारे लिए सब कुछ है। ये कहना है जयपुर के स्वराग बैंड के सदस्यों का। स्वराग बैंड की रगों में राजस्थानी लोक संगीत है तो इस संगीत को उन्होंने पश्चिमी वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी और फ्यूजन के साथ एक अलग रूप दिया है। स्वराग बैंड उदयपुर में एक निजी कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए पहुंचा। इसमें बैंड के आरिफ खान (सितार प्लेयर), आसिफ खान- (वोकल), सैफ अली खान- (तबलावादक), साजिद खान- (ड्रम प्लेयर), तसर्रूफ खान- (सेक्सोफोन), रे रोजर- (गिटारिस्ट), आरिफ खान खलूसा(खरताल, मोरचंग) शामिल हैं।
पत्रिका से विशेष बातचीत में आरिफ खान ने बताया कि घर में शुरू से ही संगीत का ही माहौल रहा है। अपने पिता महमूद खां से ही संगीत सीखा, उन्हें भी गुरू भी मानते हैं। संगीत में ही कुछ करना चाहते थे तो वर्ष 2014 में स्वराग बैंड की शुरुआत उन्होंने और प्रताप सिंह ने की। इसमें गिरिराज पुरोहित का भी साथ रहा। लेकिन फोकस इस बात पर किया कि दूसरों से बैंड किस तरह अलग हो। राजस्थानी संगीत दुनियाभर में पसंद किया जाता है लेकिन उसकी ऑडियंस और पसंद करने वाले सीमित हैं। इसलिए उसको फ्यूजन के साथ पेश करने की सोच कर बैंड की यूएसपी ही इसे बना दिया। यानी राजस्थानी लोक संगीत को पश्चिमी वाद्ययंत्रों के साथ जुगलबंदी कर उसे एक अलग अंदाज में पेश किया जाता है। इसी का एक उदाहरण है बैंड का सबसे पॉपुलर सॉन्ग केसरिया बालम.. जिसे फ्यूजन के साथ पेश करते हैं। इसी गाने को सोनी म्यूजिक लेबल के साथ हाल ही लॉन्च किया गया है।
सोशल मीडिया में तकदीर बदलने की ताकत लेकिन आगे टेलेंट ही ले जाता है
बैंड के सदस्यों ने बताया कि रानू मंडल आज एक ऐसा उदाहरण बन गया है जो सोशल मीडिया के कारण रातोंरात स्टार बन गए हैं। सोशल मीडिया में तकदीर बदलने की ताकत है। लोगों के सामने बने रहने के लिए ये आज की जरूरत भी है। ऐसे में बैंड भी सोशल मीडिया पर एक्टिव है और अब टिकटॉक पर भी बैंड के फैंस उन्हें फॉलो कर सकते हैं। वहीं, कई रियलिटी शोज भी हैं जो टेलेंट को सभी के सामने लाते हैं। राइजिंग स्टार से उन्हें भी लोगों ने जाना। लेकिन ये कहा जा सकता है कि आपका टेलेंट ही जो आपको आगे ले जाता है और टिकाए रख सकता है। उन्होंने बताया कि उनके गुरू वैसे तो पिता ही हैं लेकिन नुसरत फतह अली खां को भी वे गुरू मानते हैं। अक्सर उनके सूफी गाने वे गाते हैं। युवाओं के लिए संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जो युवा संगीत के क्षेत्र में पहचान बनाना चाहते हैं, उन्हें शास्त्रीय संगीत जरूर सीखना चाहिए।
Published on:
04 Mar 2020 07:44 pm
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